संवाददाता प्रदीप बंसल
Machalpur News नगर की सड़कों पर खुले में घूम रहे गौवंश की सुरक्षा को लेकर माचलपुर के युवाओं ने सराहनीय कदम उठाया है। सड़क हादसों से गौवंश को बचाने के लिए युवाओं ने उन्हें एकत्रित कर उनके गले में रेडियम पट्टियां बांधीं। रात के समय वाहन की हेडलाइट पड़ने पर पट्टियां चमकेंगी, जिससे वाहन चालकों को दूर से ही सड़क पर मौजूद गौवंश नजर आने की उम्मीद है।
सड़कों पर बड़ी संख्या में घूम रहा गौवंश
Machalpur News माचलपुर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में गौवंश के घूमने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। दिन के समय तो वाहन चालकों को इन्हें देखकर सावधानी बरतने का मौका मिल जाता है, लेकिन रात में अंधेरे के कारण सड़क पर बैठे या घूमते गौवंश दिखाई नहीं देते। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले भी सड़क हादसों में कई गौवंश घायल हो चुके हैं। कुछ मामलों में उनकी जान तक चली गई। इसी समस्या को देखते हुए युवाओं ने अपने स्तर पर यह पहल शुरू की है।
नगर परिषद की व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल
Machalpur News युवाओं के प्रयास के साथ ही सड़कों पर घूमते गौवंश को लेकर नगर परिषद की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि गौवंश के लिए सुरक्षित आश्रय और देखरेख की व्यवस्था है, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में पशु सड़कों पर क्यों नजर आ रहे हैं।
Machalpur News स्थानीय नागरिकों की मांग है कि नगर परिषद और प्रशासन को केवल अस्थायी उपायों पर निर्भर रहने के बजाय गौवंश के लिए स्थायी और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि यातायात भी सुचारु रहे और पशुओं को भी दुर्घटनाओं से बचाया जा सके।
निजी खर्च से इलाज भी करा रहे युवा
Machalpur News माचलपुर के युवाओं ने बताया कि वे गौवंश की सुरक्षा और देखभाल के लिए अपनी क्षमता के अनुसार लगातार काम कर रहे हैं। सड़क हादसों में घायल होने वाले गौवंश का इलाज भी कई बार युवाओं द्वारा निजी खर्च पर कराया जाता है।
अब रेडियम पट्टियां खरीदकर उन्हें गौवंश के गले में बांधने की पहल की गई है। युवाओं का कहना है कि यह कदम रात के समय दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार हो सकता है। हालांकि उनका मानना है कि स्थायी समाधान के लिए नगर परिषद और प्रशासन को भी प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गौवंश को सड़कों से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और उनकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अब देखना होगा कि युवाओं की इस पहल के बाद नगर परिषद और प्रशासन इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।




