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PM Modi-Pezeshkian Meeting : बिश्केक में पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन की मुलाकात, पश्चिम एशिया के हालात पर हुई चर्चा

PM Modi-Pezeshkian Meeting bishkek-sco-summit

PM Modi-Pezeshkian Meeting : नई दिल्ली, बिश्केक; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO Summit से इतर हुई। बैठक में भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों के साथ पश्चिम एशिया में जारी तनाव और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर बातचीत हुई। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ क्षेत्र में शांति और स्थिरता से जुड़े मुद्दे भी अहम हैं।

PM Modi-Pezeshkian Meeting : भारत-ईरान सहयोग को और मजबूत करने पर जोर

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और ईरान के बीच मौजूदा संबंधों की समीक्षा की। ईरानी पक्ष की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, दोनों देशों के साझा हित वाले क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने तथा उसका विस्तार करने पर जोर दिया गया।

बैठक में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची समेत कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी भी मौजूद रहे।

भारत और ईरान के संबंधों में व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अहम माना जा रहा है।

PM Modi-Pezeshkian Meeting : पश्चिम एशिया के तनाव के बीच हुई मुलाकात

मोदी और पेजेश्कियन के बीच पिछले कुछ महीनों में फोन पर भी बातचीत हुई है। जून में हुई बातचीत के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और आगे की स्थिति से अवगत कराया था। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया था।

बिश्केक में हुई आमने-सामने की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हुए क्षेत्रीय एवं वैश्विक प्रभावों के बीच हुई है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्ग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों का असर भारत समेत कई देशों पर पड़ता है।

PM Modi-Pezeshkian Meeting : SCO Summit में कई नेताओं से मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक में 26वें SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। भारत सरकार के अनुसार, सम्मेलन 31 अगस्त और 1 सितंबर को आयोजित हो रहा है। प्रधानमंत्री सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताओं के तौर पर सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर पर जोर देंगे।

SCO Summit से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। पश्चिम एशिया सहित क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए।

PM Modi-Pezeshkian Meeting : राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी की मुलाकात पर नजर

बिश्केक दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। इसके अलावा प्रधानमंत्री किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। SCO के मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की विभिन्न देशों के नेताओं के साथ हो रही द्विपक्षीय बैठकों को भारत की कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

PM Modi-Pezeshkian Meeting : संपादकीय नजरिया

भारत और ईरान के संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे ऐतिहासिक, आर्थिक और रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं। पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात का महत्व और बढ़ जाता है। भारत के लिए ईरान मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का महत्वपूर्ण मार्ग है, वहीं चाबहार बंदरगाह दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग की अहम कड़ी है।

हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंध, क्षेत्रीय तनाव और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चुनौतियां भारत-ईरान संबंधों की राह में बाधा बनती रही हैं। भारत को अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखते हुए ईरान के साथ संवाद और आर्थिक सहयोग जारी रखना चाहिए। खासकर व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय शांति के मुद्दों पर दोनों देशों का सहयोग महत्वपूर्ण है। बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत के लिए ईरान केवल एक साझेदार नहीं, बल्कि पश्चिम और मध्य एशिया के बीच रणनीतिक सेतु भी है।