Mahakal Sawari : पांचवीं सवारी में रामघाट पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
Mahakal Sawari : उज्जैन में सोमवार को बाबा महाकाल की पांचवीं सवारी के दौरान धार्मिक आस्था का भव्य नजारा देखने को मिला। महाकालेश्वर मंदिर से भगवान महाकाल की सवारी रामघाट पहुंची, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पालकी में विराजित भगवान चंद्रमोलेश्वर का विधि-विधान से पूजन और अर्चन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मौजूद रहे।
Mahakal Sawari : पालकी में विराजित चंद्रमोलेश्वर का किया पूजन
भगवान महाकालेश्वर की सवारी के रामघाट पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पालकी में विराजित भगवान चंद्रमोलेश्वर की पूजा की। इस दौरान पुजारी आशीष शर्मा ने चंद्रमोलेश्वर का मां शिप्रा के पवित्र जल से जलाभिषेक करवाया।धार्मिक परंपरा के अनुसार सवारी के रामघाट पहुंचने पर भगवान का पूजन और शिप्रा जल से अभिषेक विशेष महत्व रखता है। इस दौरान घाट पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के जयकारे लगाए।
Mahakal Sawari : हेलीकॉप्टर से हुई पुष्प वर्षा
महाकालेश्वर की सवारी के रामघाट पहुंचने के अवसर पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई। आसमान से बरसते फूलों के बीच बाबा महाकाल की सवारी का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।रामघाट पर धार्मिक अनुष्ठान और सवारी के स्वागत को लेकर प्रशासन की ओर से भी व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। सवारी के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक इंतजाम किए गए।
Mahakal Sawari : दत्त अखाड़ा की ओर से नाव से रामघाट पहुंचे CM
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सवारी के रामघाट पहुंचने के समय दत्त अखाड़ा साइड से नाव के जरिए रामघाट पहुंचे। उन्होंने सवारी के निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होकर भगवान चंद्रमोलेश्वर का पूजन किया।मुख्यमंत्री के नाव से रामघाट पहुंचने के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी मौजूद रहीं। इसके बाद उन्होंने धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया और भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।
Mahakal Sawari : रामघाट पर बना भक्तिमय माहौल
भगवान महाकाल की सवारी के रामघाट पहुंचने के साथ ही पूरा घाट क्षेत्र धार्मिक उत्साह से भर गया। श्रद्धालुओं में बाबा महाकाल की एक झलक पाने और सवारी के दर्शन करने को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया।पालकी में विराजित चंद्रमोलेश्वर के पूजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। शिप्रा तट पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम ने महाकाल की सवारी के पारंपरिक स्वरूप को और भव्य बना दिया।
Mahakal Sawari : जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
पूजन कार्यक्रम के दौरान उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, उज्जैन उत्तर विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।इसके अलावा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सवारी और रामघाट पर होने वाले धार्मिक आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
Mahakal Sawari : महाकाल की सवारी में उमड़ा आस्था का सैलाब
उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर की सवारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सवारी के दौरान बाबा महाकाल के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उमड़ते हैं। रामघाट पर शिप्रा नदी के तट पर होने वाला पूजन इस परंपरा का प्रमुख पड़ाव माना जाता है।पांचवीं सवारी के दौरान भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। मुख्यमंत्री द्वारा चंद्रमोलेश्वर का पूजन किए जाने और शिप्रा जल से अभिषेक की परंपरा में शामिल होने से आयोजन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया।
Mahakal Sawari : शिप्रा तट पर निभाई गई पूजन की परंपरा
महाकाल की सवारी के रामघाट पहुंचने पर शिप्रा नदी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इसी क्रम में पालकी में विराजित चंद्रमोलेश्वर का शिप्रा जल से अभिषेक कराया गया। पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।उज्जैन की धार्मिक पहचान में महाकालेश्वर मंदिर और मां शिप्रा का विशेष स्थान है। सवारी के दौरान दोनों धार्मिक परंपराओं का संगम रामघाट पर देखने को मिलता है।
Mahakal Sawari : प्रशासनिक और धार्मिक व्यवस्थाओं के बीच संपन्न हुआ आयोजन
भगवान महाकाल की पांचवीं सवारी के रामघाट पहुंचने के दौरान धार्मिक आयोजन के साथ प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम संपन्न हुआ।इस तरह बाबा महाकाल की पांचवीं सवारी का रामघाट पड़ाव धार्मिक आस्था, परंपरा और भव्य आयोजन का संगम बना। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान चंद्रमोलेश्वर का पूजन कर शिप्रा जल से अभिषेक की धार्मिक परंपरा में हिस्सा लिया।
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