दर्द से लिखी कहानी: बार डांसर से बनीं ‘आशिकी 2’ की राइटर शगुफ्ता रफीक

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BY: Yoganand Shrivastva

2013 में आई सुपरहिट फिल्म ‘आशिकी 2’ ने श्रद्धा कपूर और आदित्य रॉय कपूर को रातों-रात स्टार बना दिया। महज 15 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म दुनियाभर में 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर गई। लेकिन इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत थी इसकी कहानी, जिसे लिखा था उस महिला ने, जिसने अपनी ज़िंदगी में जितना दर्द, संघर्ष और उतार-चढ़ाव देखा, उतना शायद ही किसी ने झेला हो। हम बात कर रहे हैं लेखिका शगुफ्ता रफीक की।

बचपन से ही मुश्किलों से जंग

शगुफ्ता की असली पहचान हमेशा रहस्य रही। कुछ कहते हैं कि उन्हें मशहूर एक्ट्रेस अनवरी बेगम ने गोद लिया था, तो कुछ का मानना है कि वे उनकी नातिन थीं। सच चाहे जो भी हो, लेकिन गरीबी ने उनके बचपन से ही जिंदगी को कठिन बना दिया। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने प्राइवेट पार्टियों में डांस करना शुरू कर दिया, ताकि घर का खर्च चल सके।

जिस्मफ़रोशी की दुनिया में धकेली गई

कठिन हालात ने उन्हें वह रास्ता चुनने पर मजबूर किया, जिसे शायद कोई भी नहीं चुनना चाहेगा। 17 साल की उम्र तक वे वेश्यावृत्ति की दुनिया में पहुंच चुकी थीं। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया कि उस समय वे प्रति रात 3000 रुपये तक कमाने लगी थीं। मां के लिए सोने की चूड़ियां, अच्छा खाना और इलाज का खर्च उठाना उनकी मजबूरी थी। लेकिन यह सब उनकी आत्मा को अंदर तक तोड़ रहा था।

दुबई में बार डांसर बनीं

करीब 10 साल तक इस अंधेरी दुनिया का हिस्सा रहने के बाद वे सलाह पर दुबई चली गईं। वहां उन्होंने बार डांसर के रूप में काम किया। मर्दों के बीच गाना-बजाना, नाचना उनकी रोज़ी-रोटी बन गया। इसी दौरान एक व्यक्ति से उन्हें प्यार हुआ, शादी का प्रस्ताव भी मिला, लेकिन किस्मत ने उन्हें फिर से धोखा दिया।

महेश भट्ट ने बदली जिंदगी

1999 में उनकी मां को कैंसर हो गया, जिससे वे भारत लौट आईं। जिंदगी का असली मोड़ साल 2002 में आया, जब उनकी मुलाकात महेश भट्ट से हुई। उन्होंने भट्ट साहब से कहा कि वे लिखना चाहती हैं क्योंकि उन्होंने जीवन को उसकी असली गहराई में महसूस किया है।

2006 में उन्हें पहला ब्रेक मिला – मोहित सूरी की फिल्म ‘कलयुग’ के कुछ दृश्य लिखने का मौका। इसके बाद उन्होंने ‘वो लम्हें’, ‘राज 2’, ‘मर्डर 2’ और ‘आशिकी 2’ जैसी सफल फिल्मों से अपना नाम चमका दिया।

संघर्ष से कामयाबी तक

शगुफ्ता की ज़िंदगी इस बात की मिसाल है कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, इंसान अगर हिम्मत न हारे तो अंधेरे से रोशनी की तरफ रास्ता बना सकता है। उनकी कलम ने उनके दर्द को अमर कर दिया और हिंदी सिनेमा को कुछ बेहतरीन कहानियां दीं।

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