रामगढ़: धरोहर बचाने को राजनीति और आस्था दोनों में मचा हंगामा

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Ramgarh: There was uproar in politics and faith to save the heritage

रिपोर्ट- दिनेश गुप्ता

छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले का ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। यह वही स्थान है जहां प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के प्रवास का उल्लेख मिलता है, जिसे स्थानीय लोग नैनीहाल कहते हैं। यही नहीं, महाकवि कालिदास ने भी यहीं बैठकर अपनी कालजयी रचना मेघदूत की रचना की थी। लेकिन अब यह धरोहर कोयला खनन की गतिविधियों के कारण खतरे में आ गई है।

अदानी की कोयला खदानों से बढ़ा खतरा

सरगुजा जिले के उदयपुर स्थित रामगढ़ पहाड़ सिर्फ एक प्राकृतिक धरोहर नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र भी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अदानी द्वारा संचालित परसा ईस्ट केते बासेन कोल माइंस के ब्लास्ट की वजह से पहाड़ों में दरारें पड़ रही हैं।
पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव ने इस गंभीर मामले पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में भी बयानबाज़ी तेज हो गई है।

टी.एस. सिंहदेव का बयान

सिंहदेव का कहना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाना सरकार की जिम्मेदारी है। अगर खदानों की गतिविधियों से पहाड़ को नुकसान हो रहा है, तो तत्काल रोकथाम के कदम उठाए जाने चाहिए।

सरकार की प्रतिक्रिया

मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री और स्थानीय विधायक राजेश अग्रवाल ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि समिति यह जांच करेगी कि वास्तव में कोयला खदानों की गतिविधियों से रामगढ़ पहाड़ को नुकसान हो रहा है या नहीं।

राजेश अग्रवाल का बयान

पर्यटन मंत्री ने कहा—

“रामगढ़ वह ऐतिहासिक धरोहर है जहां महाकवि कालिदास ने मेघदूत की रचना की थी। मैं स्वयं पिछले 50 वर्षों से यहां भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना और भंडारे में शामिल होता आ रहा हूं। अगर खदानों की वजह से इस धरोहर को कोई क्षति पहुंच रही है, तो सरकार इसका कड़ा विरोध करेगी। रामगढ़ के अस्तित्व को बचाने के लिए हम हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं।”

राजनीति बनाम आस्था

रामगढ़ पहाड़ को बचाने की लड़ाई अब सिर्फ सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक रंग भी ले चुकी है। विपक्ष जहां सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार का दावा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ठोस कार्रवाई की जाएगी।

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