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Motivational : संत कबीर दास जी के दोहे आपके जीवन को बदल देंगे

Motivational Sant Kabir Das ke dohe

by : digital desk

Motivational : संत कबीर दास के दोहे जीवन के यथार्थ, नश्वरता, विनम्रता और ईश्वर भक्ति का बोध कराते हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं। उनके दोहे अहंकार छोड़कर प्रेम मार्ग अपनाने, समय का सदुपयोग करने और आत्म-निरीक्षण करने की सीख देते हैं।

कबीर दास जी के जीवन से जुड़े प्रमुख दोहे

Motivational : मानव जीवन की दुर्लभता

“दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार।
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।।”

अर्थ: मनुष्य का जन्म बहुत मुश्किल से मिलता है, यह शरीर बार-बार नहीं मिलता। जिस तरह पेड़ से पत्ता टूटकर दोबारा नहीं जुड़ता, वैसे ही यह जीवन खत्म होने पर वापस नहीं आता।

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Motivational : अहंकार और नश्वरता

“कबीर गर्व न कीजिए, ऊँचा देखि आवास।
काल परों भुईं लेटना, ऊपर जमसी घास।।”

अर्थ: ऊँचा घर देखकर अहंकार न करें। समय आने पर इसी धरती पर लेटना है और ऊपर घास जम जाएगी, अर्थात शरीर नश्वर है।

Motivational : प्रेम का महत्व

“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।”

अर्थ: बड़ी-बड़ी किताबें पढ़कर कोई ज्ञानी नहीं बनता, जो प्रेम के दो-ढाई अक्षर पढ़ ले, वही असली ज्ञानी है।

Motivational : मन की चंचलता (माया)

“माया मुई न मन मुवा, मरि-मरि गया सरीर।
आसा त्रिष्णाँ नाँ मुई, यौं कहै दास कबीर।।”

अर्थ: शरीर तो बार-बार मरता है, लेकिन मन की इच्छाएं (आशा और तृष्णा) कभी नहीं मरतीं।

Motivational : वाणी का महत्व

“ऐसी बानी बोलिये, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करै, आपहु शीतल होय।।”

अर्थ: हमें अहंकार छोड़कर ऐसी मीठी वाणी बोलनी चाहिए, जिससे दूसरों को सुख मिले और खुद का मन भी शांत रहे।

Motivational : आत्मज्ञान (ईश्वर की खोज)

“कस्तूरी कुंडल बसे, मृग ढूंढे वन माहि।
तैसा घट-घट राम है, दुनिया देखै नाहि।।”

अर्थ: ईश्वर हर इंसान के हृदय में वास करते हैं, लेकिन लोग उन्हें बाहर मंदिरों-तीर्थों में ढूंढते हैं।

Motivational : संतोष और संयम

“साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाय।।”

अर्थ: हे प्रभु! मुझे केवल इतना ही धन-दौलत दीजिए, जिसमें मेरा परिवार चल सके। न मैं भूखा रहूँ, न मेरे दरवाजे से कोई साधु भूखा जाए।

Motivational : समय की नजाकत

“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरी करेगा कब।।”

अर्थ: जो काम कल करना है, उसे आज करो, और जो आज करना है, उसे अभी करो। अगर समय बीत गया, तो काम कभी नहीं होगा।

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