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Magh Mela : स्नान किए बिना माघ मेले से लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, धरना खत्म करने का ऐलान

Magh Mela

Magh Mela : प्रयागराज; उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जारी माघ मेला इस बार एक बड़े विवाद को लेकर चर्चा में है। उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ पीठ के प्रमुख शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने माघ मेले में बिना स्नान किए वापस लौटने का निर्णय लिया है। उन्होंने 28 जनवरी को यह घोषणा करते हुए कहा कि दुखी मन से वह मेले से जा रहे हैं।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बयान जारी कर दावा किया कि इतिहास में यह पहली बार है जब किसी शंकराचार्य को माघ मेले से बिना स्नान किए लौटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवहार से आहत होकर यह निर्णय लेना पड़ा।

Magh Mela : मौनी अमावस्या के दिन से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ संगम स्नान के लिए पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रथ के साथ आगे बढ़ने से रोक दिया। इसी बात को लेकर प्रशासन और उनके अनुयायियों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए थे।

उनकी मांग थी कि जिन अधिकारियों ने उन्हें रोका, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके बाद ही वह संगम में स्नान करेंगे। हालांकि, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उनसे स्नान करने की अपील भी की थी।

Magh Mela : प्रशासन ने क्या कहा

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, जिलाधिकारी मनीष वर्मा और पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता की। अधिकारियों का कहना था कि उस समय संगम क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ और कोहरे के कारण रथ के साथ जाना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं था।

प्रशासन के अनुसार, शंकराचार्य को पैदल या पालकी से जाने का सुझाव दिया गया था, लेकिन इस दौरान उनके अनुयायियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचा।

इसके बाद मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर पूछा कि भविष्य के मेलों में उनकी भागीदारी पर रोक क्यों न लगाई जाए। इसी क्रम में उनके द्वारा ‘शंकराचार्य’ उपाधि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए, जिससे विवाद और गहरा गया।

Magh Mela : राजनीतिक बयानबाज़ी तेज

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसके लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य से प्रमाण मांगना सनातन परंपरा का अपमान है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बयान दिया और प्रशासनिक कार्रवाई को मर्यादा के खिलाफ बताया। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने भी उनसे मुलाकात कर समर्थन जताया।

हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए ‘कालनेमि’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए धर्म की आड़ में भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहने की बात कही। इस बयान पर भी शंकराचार्य ने आपत्ति जताई और कहा कि मुख्यमंत्री को धर्म-अधर्म के बजाय विकास, शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर बात करनी चाहिए।

Magh Mela : समर्थन और विरोध दोनों

जहां द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बयान दिया, वहीं जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रशासन के कदम को सही ठहराया और कहा कि नियमों का पालन सभी को करना चाहिए।

Magh Mela : शंकराचार्य बनने को लेकर पुराना विवाद

गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य बनने को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अक्टूबर 2022 में अदालत ने उनके औपचारिक पट्टाभिषेक पर रोक लगाई थी, हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि यह रोक केवल औपचारिक प्रक्रिया पर है, न कि शंकराचार्य के रूप में कार्य करने पर।

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