Dabra सिविल अस्पताल में ‘बीमार’ व्यवस्थाएं: मासूम के इलाज में लापरवाही पर भीम आर्मी का ‘हल्ला बोल’

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Report: Santosh saravgee

Dabra (ग्वालियर)। ग्वालियर जिले के डबरा सिविल अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। एक मासूम बच्ची को समय पर इलाज न मिलने और अस्पताल की बदहाली को लेकर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में जमकर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज के बजाय दलाली को बढ़ावा देने और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

Dabra गार्ड बना ‘डॉक्टर’: गेट से ही मासूम को लौटाने का आरोप

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब भीम आर्मी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता की 5-8 वर्षीय बच्ची पर अचानक दीवार गिर गई। घायल अवस्था में बच्ची को तत्काल डबरा सिविल अस्पताल लाया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के गेट पर तैनात गार्ड ने ही खुद डॉक्टर की भूमिका निभाते हुए कह दिया कि “यहाँ बच्चों का डॉक्टर नहीं है, इसे ग्वालियर ले जाओ।” बिना किसी प्राथमिक उपचार या डॉक्टर के परीक्षण के मरीज को लौटाने की इस संवेदनहीनता ने कार्यकर्ताओं के गुस्से को भड़का दिया।

Dabra वार्डों में नारकीय स्थिति: भीषण गर्मी में प्रसूता और नवजात बेहाल

हंगामे के दौरान कार्यकर्ताओं ने जब अस्पताल का निरीक्षण किया, तो वहां की स्थिति और भी भयावह मिली। महिला वार्ड में भीषण गर्मी के बावजूद न तो एसी चल रहे थे और न ही पंखे। नवजात बच्चे और प्रसूता महिलाएं पसीने से तर-बतर और परेशान नजर आईं। कार्यकर्ताओं का दावा है कि वार्डों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है और मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है। इसके अलावा, रिकॉर्ड में मौजूद होने के बावजूद अस्पताल में एंटी-रेबीज और एंटी-वेनम जैसे जीवन रक्षक इंजेक्शन उपलब्ध नहीं पाए गए।

Dabra जिम्मेदारों की चुप्पी: सवालों से भागते नजर आए अधिकारी

अस्पताल की इस बदहाली और भीम आर्मी के आरोपों पर जब जिम्मेदार अधिकारी आलोक त्यागी से सवाल किए गए, तो वे कैमरे के सामने बचते नजर आए। मीडिया द्वारा पूछे गए तीखे सवालों का संतोषजनक जवाब देने के बजाय उन्होंने टालमटोल कर अपना पल्ला झाड़ लिया। फिलहाल, भीम आर्मी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘बीमार’ अस्पताल का इलाज कब तक करता है।

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