BY
Yoganand Shrivastava
Chennai तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता का संघर्ष अपने चरम पर पहुँच गया है। गुरुवार को राजभवन में राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर और ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के प्रमुख थलापति विजय के बीच हुई मुलाकात ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। राज्यपाल ने विजय के सरकार बनाने के दावे पर स्थिरता का सवाल खड़ा किया है, जिसके जवाब में सुपरस्टार से राजनेता बने विजय ने डंके की चोट पर फ्लोर टेस्ट की चुनौती स्वीकार कर ली है।

Chennai बहुमत का पेच: 118 का लक्ष्य और 113 की चुनौती
राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर ने विजय से सीधा सवाल किया कि 234 सदस्यीय विधानसभा में 118 के बहुमत के आंकड़े के मुकाबले उनके पास केवल 113 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में एक स्थिर सरकार चलाना कैसे मुमकिन होगा? राज्यपाल ने उन दलों की लिखित सूची भी मांगी है जो TVK को बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं। विजय ने स्पष्ट किया कि वे संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करेंगे और सदन के पटल पर अपना संख्या बल साबित करने के लिए पूरी तरह आश्वस्त हैं।

Chennai गठबंधन की गणित: कांग्रेस का साथ और सहयोगियों का इंतज़ार
विजय की पार्टी TVK के पास फिलहाल 108 सीटें हैं। बहुमत के लिए उन्हें 10 और सीटों की दरकार है। कांग्रेस (5 सीटें) ने ‘सांप्रदायिक ताकतों’ से दूर रहने की शर्त पर समर्थन का संकेत दिया है। वहीं, विजय की नज़र CPI, CPM और VCK जैसे दलों पर है, जो वर्तमान में DMK के पाले में हैं। इसके अलावा PMK को साथ लाना भी एक बड़ी चुनौती है क्योंकि उनका झुकाव भाजपा की तरफ रहा है। यदि ये छोटे दल साथ आते हैं, तो विजय का आंकड़ा 122 के पार जा सकता है।

Chennai रिसॉर्ट पॉलिटिक्स: सेंधमारी के डर से घेराबंदी शुरू
राजनीति के मैदान में नए होने के बावजूद विजय पुराने मंझे हुए खिलाड़ियों की तरह ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ का सहारा ले रहे हैं। किसी भी संभावित टूट-फूट को रोकने के लिए विजय ने अपने 107 नवनिर्वाचित विधायकों को महाबलिपुरम के एक रिसॉर्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच शिफ्ट कर दिया है। दूसरी ओर, AIADMK के एक बागी धड़े के विधायकों के पुडुचेरी में होने की चर्चा है, हालांकि AIADMK के शीर्ष नेतृत्व ने विजय के साथ किसी भी तरह के गठबंधन से साफ़ इनकार किया है।
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