BY: Yoganand Shrivastva
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जल्द ही भारतीय सेना की ताकत को और मजबूत करने जा रहा है। 18 जून 2025 को ISRO EOS-09 सैटेलाइट (RISAT-1B) को लॉन्च करने जा रहा है, जो देश की निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को कई गुना बढ़ा देगा।
इस एडवांस सैटेलाइट की लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगी और यह रक्षा, आपदा प्रबंधन और संसाधनों की निगरानी में अहम भूमिका निभाएगा।
🛰️ EOS-09 सैटेलाइट की खासियतें
- लॉन्च व्हीकल: पीएसएलवी-सी61 एक्सएल
- वजन: 1,710 किलोग्राम
- कक्षा: 529 किलोमीटर ऊंचाई पर पृथ्वी की लो अर्थ ऑर्बिट
- टेक्नोलॉजी: C-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR)
📸 दिन-रात हाई-रेज़ोल्यूशन निगरानी
EOS-09 सैटेलाइट की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह दिन हो या रात, किसी भी मौसम में सतह की हाई-रेज़ोल्यूशन तस्वीरें लेने में सक्षम है। इसका मतलब है कि भारतीय सेना को 24×7 निगरानी की सुविधा मिलेगी, जिससे सीमाओं की सुरक्षा और ऑपरेशनल प्लानिंग बेहतर हो सकेगी।
🪖 भारतीय सेना को क्या मिलेगा फायदा?
EOS-09 सैटेलाइट RISAT (Radar Imaging Satellite) सीरीज़ का सातवां संस्करण है और इसे खास तौर पर सैन्य निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। इस सैटेलाइट से भारतीय सेना को मिलेंगे:
- दुश्मन की गतिविधियों पर रियल-टाइम निगरानी
- टारगेट की सटीक लोकेशन और मूवमेंट ट्रैकिंग
- मिशन प्लानिंग और टैक्टिकल ऑपरेशंस में सहायता
- बॉर्डर सिक्योरिटी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में मजबूती
🌪️ आपदा प्रबंधन और संसाधनों की निगरानी में भी उपयोगी
EOS-09 सिर्फ रक्षा ही नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी जैसे नागरिक उद्देश्यों के लिए भी उपयोगी होगा:
- बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसे आपदाओं की रियल टाइम जानकारी
- वन क्षेत्र और जल संसाधनों की निगरानी
- अवैध खनन और वनों की कटाई पर नजर
📅 लॉन्चिंग की तारीख और समय
- लॉन्च डेट: 18 जून 2025
- समय: सुबह 6:59 बजे
- स्थान: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश
इस मिशन को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह न सिर्फ सैन्य क्षेत्र में बल्कि नागरिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है।
🔍 भारत की निगरानी और सुरक्षा प्रणाली को मिलेगी नई धार
EOS-09 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण भारत को निगरानी और सुरक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाई पर ले जाएगा। ISRO का यह मिशन रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने और अंतरिक्ष आधारित टेक्नोलॉजी का सर्वोत्तम उपयोग करने की दिशा में एक और मजबूत कदम है।





