इंदौर में एमपी का पहला क्रिकेट म्यूजियम: ब्रैडमैन के बैट से लेकर कोहली की जर्सी तक सब शामिल

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इंदौर में एमपी का पहला क्रिकेट म्यूजियम: ब्रैडमैन के बैट से लेकर कोहली की जर्सी तक सब शामिल

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक खास तोहफा मिला है। यहां प्रदेश का पहला क्रिकेट म्यूजियम शुरू हुआ है, जिसमें 18वीं सदी से लेकर आज तक के क्रिकेट इतिहास की 300 से अधिक दुर्लभ वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।

यह म्यूजियम मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) और पुणे स्थित ब्लेड्स ऑफ ग्लोरी क्रिकेट म्यूजियम ने मिलकर 6 साल में तैयार किया है। इसका उद्घाटन 7 जुलाई को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया था और 15 जुलाई से इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया है।


म्यूजियम में क्या-क्या है खास?

इस म्यूजियम में क्रिकेट की दुनिया से जुड़े अनगिनत कीमती खजाने मौजूद हैं। इनमें शामिल हैं—

  • क्रिकेट की बाइबल “विजडन मैगजीन” के 1952 से लेकर अब तक के स्पेशल एडिशन।
  • डॉन ब्रैडमैन और सचिन तेंदुलकर के ओरिजनल बैट।
  • विराट कोहली की वह जर्सी, जिसमें उन्होंने इंदौर में 211 रन बनाए थे।
  • शेन वार्न की शर्ट और सौरव गांगुली, अनिल कुंबले की उपयोग की गई सामग्री।
  • कपिल देव का मशहूर “मंगूस बैट”, जिससे उन्होंने 1983 वर्ल्ड कप में 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी।

डेनिस लिली का एल्यूमीनियम बैट और ICC का बदला नियम

म्यूजियम में ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज गेंदबाज डेनिस लिली का साइन किया हुआ एल्यूमीनियम बैट भी रखा गया है।

  • 1979 की एशेज सीरीज के दौरान लिली इसी बैट से खेले थे।
  • इंग्लैंड टीम ने शिकायत की थी कि इससे गेंद का आकार बिगड़ रहा है।
  • विवाद के बाद ICC ने नया नियम बनाया, जिसके तहत अब सिर्फ लकड़ी के बैट की ही अनुमति है।

किताबें, फोटो और क्रिकेट की महक

यह म्यूजियम सिर्फ बैट-बॉल तक सीमित नहीं है। यहां क्रिकेट पर लिखी किताबें, दुर्लभ फोटो और खिलाड़ियों की यादगार सामग्री भी प्रदर्शित है।

  • विराट कोहली और एमएस धोनी की टी-शर्ट।
  • आवेश खान के शूज, रजत पाटीदार और वेंकटेश अय्यर के बैट।
  • उन हेलमेट और कपड़ों का संग्रह, जिनसे खिलाड़ियों के पसीने और मेहनत की महक आज भी महसूस की जा सकती है।

कर्नल सीके नायडू का 30 किलो का बैग

म्यूजियम में प्रवेश करते ही भारत के पहले टेस्ट कप्तान कर्नल सीके नायडू की प्रतिमा दिखाई देती है। इसके पास रखा है उनका 30 किलो वजनी लोहे का किट बैग, जिसे उठाने के लिए दो लोगों की जरूरत पड़ती थी।

उनके बैट, कोट और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं भी यहां खास आकर्षण का हिस्सा हैं।


दुर्लभ क्रिकेट धरोहरें

  • 1986 का टाई टेस्ट (भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, चेन्नई) में इस्तेमाल स्टंप का टुकड़ा।
  • 2008 में टूटा हुआ सुरेश रैना का बैट।

क्यों खास है यह म्यूजियम?

इंदौर का यह क्रिकेट म्यूजियम न सिर्फ खेल प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक खजाना है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह बताएगा कि क्रिकेट कैसे समय के साथ बदलता गया।
यहां मौजूद वस्तुएं दर्शाती हैं कि क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक संस्कृति है, जिसने खिलाड़ियों, प्रशंसकों और पूरे देश को जोड़े रखा है।


यदि आप क्रिकेट प्रेमी हैं, तो इंदौर का यह म्यूजियम आपके लिए स्वर्ग से कम नहीं। यह जगह आपको 18वीं सदी से लेकर आधुनिक क्रिकेट तक की झलक एक ही छत के नीचे देगी।

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