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India- Nepal के बीच बढ़ रहा ‘चाय विवाद’, दार्जिलिंग ब्रांड और व्यापारिक पाबंदियों से गहराया तनाव

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India- Nepal: भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में हाल के वर्षों में कई मुद्दों को लेकर तनाव देखने को मिला है। लिपुलेख सीमा विवाद के बाद अब चाय व्यापार भी दोनों देशों के बीच मतभेद की बड़ी वजह बनता जा रहा है। नेपाली चाय के भारत में घटते निर्यात और लगातार सख्त होते नियमों को लेकर नेपाल के कारोबारी और सरकार नाराज नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञ इसे अब “चाय की जंग” का नाम देने लगे हैं।

India- Nepal: दार्जिलिंग चाय बना विवाद का केंद्र

नेपाल और भारत के बीच चाय व्यापार को लेकर विवाद नया नहीं है। पिछले एक दशक से यह मुद्दा समय-समय पर सामने आता रहा है। खासतौर पर दार्जिलिंग चाय के ब्रांड और उसकी पहचान को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद गहराते गए।

विश्लेषकों के अनुसार नेपाली ऑर्थोडॉक्स चाय की गुणवत्ता और स्वाद दार्जिलिंग चाय से काफी मिलता-जुलता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों की तुलना होने लगी है। भारतीय चाय उद्योग को आशंका है कि इससे दार्जिलिंग ब्रांड की पहचान प्रभावित हो सकती है।

India- Nepal: 2017 में खुलकर सामने आया था विवाद

चाय व्यापार को लेकर विवाद पहली बार बड़े स्तर पर जुलाई 2017 में चर्चा में आया था। उस समय दार्जिलिंग टी एसोसिएशन ने तत्कालीन राष्ट्रपति Pranab Mukherjee से नेपाली चाय के आयात पर रोक लगाने की मांग की थी। इसके बाद से भारतीय बाजार में नेपाली चाय को लेकर लगातार निगरानी और सख्ती बढ़ती गई।

India- Nepal: भारत ने कड़े किए आयात नियम

अप्रैल 2024 में भारत ने नेपाली चाय के आयात को लेकर नियम और सख्त कर दिए। भारतीय सीमा शुल्क अधिकारियों ने चाय की हर खेप के लिए 100 प्रतिशत सैंपल टेस्टिंग अनिवार्य कर दी। इसके बाद नेपाली चाय के आयात में देरी और जांच बढ़ गई।

नेपाल के व्यापारियों का कहना है कि इन नियमों के कारण चाय निर्यात प्रभावित हो रहा है और कारोबार को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

India- Nepal: पश्चिम बंगाल सरकार ने भी जताई चिंता

जून 2025 में Mamata Banerjee ने भी नेपाली चाय को लेकर चिंता जाहिर की थी। उनका कहना था कि बिना शुल्क के आने वाली नेपाली चाय दार्जिलिंग चाय के ब्रांड को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से नेपाल-भारत व्यापार संधि के तहत मिलने वाली कर छूट वापस लेने की मांग की थी।

भारतीय चाय उद्योग का आरोप है कि कई जगह नेपाली चाय को दार्जिलिंग चाय के नाम पर बेचा जा रहा है, जिससे असली दार्जिलिंग ब्रांड की विश्वसनीयता कमजोर पड़ रही है।

India- Nepal: नेपाल ने भारत के रवैये पर जताई नाराजगी

नेपाल के चाय कारोबारी भारत की नई नीतियों से नाराज हैं। उनका कहना है कि नेपाल-भारत व्यापार संधि के बावजूद बार-बार नए नियम और टेस्टिंग प्रक्रिया लागू कर व्यापार में रुकावट पैदा की जा रही है।

नेपाली व्यापारियों के अनुसार अगर गुणवत्ता ही चिंता का विषय होती तो सीमा पर आधुनिक जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जा सकती थीं। उनका आरोप है कि भारत प्रशासनिक प्रक्रियाओं के जरिए नेपाली चाय के कारोबार को धीमा करने की कोशिश कर रहा है।

India- Nepal: ‘ब्रांड की राजनीति’ बता रहे विशेषज्ञ

नेपाल चाय उत्पादक संघ के पदाधिकारियों और चाय विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद असल में “ब्रांड की लड़ाई” है। उनका कहना है कि दार्जिलिंग चाय का उत्पादन सीमित है, जबकि वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नेपाली ऑर्थोडॉक्स चाय तेजी से बाजार में अपनी जगह बना रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय पक्ष को यह डर है कि अगर नेपाली चाय की अलग पहचान मजबूत हो गई तो दार्जिलिंग चाय का अंतरराष्ट्रीय बाजार कमजोर पड़ सकता है।

India- Nepal: भारतीय बाजार पर निर्भर है नेपाली चाय उद्योग

नेपाल का चाय उद्योग काफी हद तक भारतीय बाजार पर निर्भर है। नेपाल के नेशनल टी एंड कॉफी डेवलपमेंट बोर्ड के अनुसार देश में हर साल करीब 27.5 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है। चाय की खेती लगभग 20 हजार हेक्टेयर जमीन पर की जाती है और इससे करीब 60 हजार लोगों को रोजगार मिलता है।

नेपाल के झापा और इलाम क्षेत्रों में उत्पादित करीब 80 प्रतिशत चाय भारत में बेची जाती है, जबकि केवल 20 प्रतिशत चाय घरेलू बाजार में खपत होती है।

India- Nepal: अरबों रुपए का है कारोबार

नेपाल हर साल लगभग 10 मिलियन किलोग्राम चाय भारत को निर्यात करता है। इसकी कुल कीमत करीब 4 से 5 अरब नेपाली रुपए बताई जाती है। ऐसे में भारत की ओर से लगाए गए प्रतिबंध और सख्त नियम नेपाली किसानों और निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेद इसी तरह बढ़ते रहे तो इसका असर सिर्फ चाय उद्योग ही नहीं, बल्कि भारत-नेपाल संबंधों पर भी पड़ सकता है।

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