BY: Yoganand Shrivastva
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष के बाद जब सीजफायर की घोषणा हुई, तब से सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहसें और व्यक्तिगत हमले बढ़ते जा रहे हैं। इसी बीच भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जाने लगा।
न सिर्फ मिस्री, बल्कि उनके परिवार—विशेष रूप से उनकी बेटी—को भी ट्रोलिंग का शिकार बनाया गया।
क्या हुआ सोशल मीडिया पर?
- कुछ यूज़र्स ने विक्रम मिस्री की पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए अभद्र टिप्पणियां कीं।
- उनकी बेटी की पर्सनल जानकारी (जैसे संपर्क नंबर और सोशल मीडिया हैंडल) भी ऑनलाइन लीक कर दी गई।
- बढ़ती ट्रोलिंग के चलते विदेश सचिव ने अपना ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट प्रोटेक्टेड मोड में कर लिया।
महिला आयोग का कड़ा रुख
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और साफ कहा:
“विदेश सचिव की बेटी के साथ किया गया ऑनलाइन दुर्व्यवहार गोपनीयता का घोर उल्लंघन है। यह न सिर्फ अनैतिक है बल्कि उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए भी खतरा है।”
आयोग ने सोशल मीडिया कंपनियों और संबंधित अधिकारियों से:
- इस मामले की तत्काल जांच की मांग की।
- सुरक्षा बढ़ाने और गोपनीय जानकारी को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
क्या कहता है यह मामला?
यह घटना दिखाती है कि राजनीतिक विवाद अब व्यक्तिगत सीमाएं लांघने लगे हैं। किसी भी सरकारी अधिकारी के परिवार को इस प्रकार निशाना बनाना न सिर्फ नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह कानूनन भी आपत्तिजनक है।
सोशल मीडिया यूज़र्स की प्रतिक्रिया
घटना सामने आने के बाद आम यूज़र्स और बुद्धिजीवियों ने भी इस ट्रोलिंग की आलोचना की:
- “यह निजी नहीं बल्कि राष्ट्रीय सेवा से जुड़े व्यक्ति का अपमान है।”
- “राजनीतिक असहमति को व्यक्तिगत हमले में बदलना खतरनाक चलन है।”
ऑनलाइन ट्रोलिंग की घटनाएं अब सीमाएं पार कर रही हैं और परिवार के सदस्यों तक पहुंच रही हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बेटी के मामले ने एक बार फिर ये साबित किया है कि सोशल मीडिया की आज़ादी के साथ जिम्मेदारी भी ज़रूरी है।
इस मामले में महिला आयोग की त्वरित प्रतिक्रिया एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अब जरूरी है कि साइबर सुरक्षा कानूनों को और मजबूत किया जाए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।





