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Cinema news: मुगल-ए-आज़म: उस फिल्म की कहानी, जिसने थिएटरों में दीवानगी मचा दी

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Cinema news: मुगल-ए-आज़म हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और कल्ट फिल्मों में से एक मानी जाती है। पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला की यह लव स्टोरी अपने समय में दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर गई। फिल्म के निर्देशक के आसिफ ने इसे बेहद भव्य और यादगार बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया। फिल्म ने दर्शकों को थिएटर तक खींचने के लिए ऐसा क्रेज पैदा किया कि लोग घंटों लाइन में खड़े रहते और टिकट पाने के लिए सड़क पर ही सो जाते थे। कभी-कभी टिकट विंडो पर 5 किलोमीटर लंबी लाइनें लग जाती थीं।

फिल्म का निर्माण और रिलीज़ का लंबा सफर
मुगल-ए-आज़म की शूटिंग 1944 में शुरू हुई थी और इसे 1960 में रिलीज़ किया गया। निर्माण में पूरे 16 साल लगे और इसके लिए भारी बजट खर्च किया गया, जिसकी वजह से निर्देशक के आसिफ आर्थिक परेशानियों में भी आए। फिल्म ने नेशनल अवार्ड समेत कई पुरस्कार अपने नाम किए और बॉक्स ऑफिस पर लंबे समय तक राज किया।

भव्य सीन और रिकॉर्डिंग के किस्से
फिल्म के कुछ सीन बेहद भव्य थे। उदाहरण के लिए, सलीम और अकबर के युद्ध सीन में 2000 ऊंट, 4000 घोड़े और 8000 सैनिकों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, इंडियन आर्मी के सैनिक भी फिल्म में शामिल किए गए थे। फिल्म में भगवान कृष्ण की मूर्ति शुद्ध सोने की बनी थी।

डिजिटल कलरिंग और आधुनिक रिलीज़
मुगल-ए-आज़म को पहले ब्लैक-एंड-व्हाइट में रिलीज़ किया गया था, लेकिन 2004 में इसे डिजिटल कलरिंग के साथ दोबारा रिलीज़ किया गया। यह फिल्म न केवल कहानी और अभिनय के लिए बल्कि भव्यता और सिनेमाई अनुभव के लिए भी आज तक याद की जाती है।

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