रिपोर्ट- प्रयास कैवर्त, एडिट- विजय नंदन
छत्तीसगढ़ का मरवाही वन मंडल, जिसे ‘भालुओं की धरती’ कहा जाता है, एक बार फिर चर्चा में है। यहां भाड़ी गांव की डोंगरी में ग्रामीणों ने एक दुर्लभ सफेद स्लॉथ भालू को देखा है। इस भालू को लोगों ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद इसका वीडियो तेजी से वायरल हो गया। इस अनोखे जीव को देखने के लिए इलाके में लोगों की भारी भीड़ जुट रही है। वन विभाग ने अपील की है कि लोग भालू के पास न जाएं और उसकी सुरक्षा में बाधा न डालें।
क्यों होता है भालू का रंग सफेद?
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह भालू किसी नई प्रजाति का नहीं है, बल्कि इसका रंग एल्बिनिज़म (Albinism) नामक जेनेटिक स्थिति की वजह से सफेद है। इस स्थिति में भालू के शरीर में मेलेनिन (Melanin) नामक पिगमेंट नहीं बनता, जिससे उसकी त्वचा और बालों में रंग नहीं आता और वह सफेद दिखाई देता है।

मरवाही की पहचान
मरवाही वन क्षेत्र दुर्लभ सफेद स्लॉथ भालुओं की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। इस प्रजाति के भालू बहुत कम देखे जाते हैं। वन्यजीव प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए यह दृश्य एक बार फिर अध्ययन का महत्वपूर्ण अवसर बना है।
भारत में मुख्य रूप से भालुओं की 3 प्रजातियाँ प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं
स्लॉथ भालू (Sloth Bear – Melursus ursinus)
भारत की सबसे आम भालू प्रजाति।
यह वही भालू है जो छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, झारखंड आदि में देखा जाता है।

इन प्रमुख उद्यानों में पाए जाते हैं भालू
- कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (मध्यप्रदेश)
- बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान (मध्यप्रदेश)
- सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व (मध्यप्रदेश)
- टाडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व (महाराष्ट्र)
- संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (महाराष्ट्र)
- सिमलिपाल राष्ट्रीय उद्यान (ओडिशा)
- कावेरि वन्यजीव अभयारण्य (कर्नाटक)
इन उद्यानों में हिमालयी काला भालू पाए जाते हैं
- जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (उत्तराखंड)
- राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड)
- ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (हिमाचल प्रदेश)
- डाचिगाम नेशनल पार्क (जम्मू-कश्मीर)
- नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान (अरुणाचल प्रदेश)
- हेमिस नेशनल पार्क (लद्दाख)
- किब्बर वन्यजीव अभयारण्य (हिमाचल प्रदेश)
- पिंडारी ग्लेशियर क्षेत्र (उत्तराखंड)
- स्पीति घाटी, काश्मीर और कराकोरम क्षेत्र





