ग्वालियर शुगर कंपनी लिमिटेड, डबरा को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कंपनी पर लगाई गई करोड़ों रुपए की पेनल्टी को निरस्त कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि जिस जमीन पर विवाद हुआ था, वह 1940 से ही गैर-कृषि कार्यों के लिए पट्टे पर दी गई थी।
जमीन का इतिहास
- यह जमीन डबरा और रामगढ़ क्षेत्र में स्थित है।
- तत्कालीन जमींदारों ने इसे कंपनी को फैक्ट्री और श्रमिक सुविधाओं के लिए पट्टे पर दिया था।
- कंपनी ने यहां शुगर फैक्ट्री, कर्मचारियों के लिए आवास, स्कूल, अस्पताल और पार्क का निर्माण किया।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
वर्ष 2012 में डबरा एसडीएम ने कंपनी पर आरोप लगाया कि उसने बिना अनुमति भूमि का उपयोग बदला है। इसके बाद कंपनी पर भारी वित्तीय भार डाला गया:
- ₹86.40 लाख भूमि राजस्व
- ₹12.13 करोड़ प्रीमियम
- ₹2.53 करोड़ पेनल्टी
हालांकि, कंपनी की सभी अपीलें कलेक्टर, आयुक्त और राजस्व मंडल तक खारिज कर दी गईं। अंततः कंपनी ने राहत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
कंपनी और शासन के तर्क
- कंपनी का पक्ष: भूमि हमेशा से गैर-कृषि कार्यों के लिए थी, इसलिए किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ।
- राज्य शासन का पक्ष: कंपनी ने बिना डायवर्जन आदेश लिए भूमि उपयोग बदला, इसलिए दंड सही था।
हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने पाया कि एसडीओ ने कंपनी को नोटिस का सही मौका दिए बिना एकतरफा आदेश पारित किया था। कोर्ट ने:
- पेनल्टी और अन्य आदेश रद्द किए।
- पूरा मामला पुनर्विचार के लिए एसडीएम डबरा को वापस भेज दिया।
यह फैसला न केवल ग्वालियर शुगर कंपनी के लिए राहत है, बल्कि भविष्य में ऐसे विवादों पर भी स्पष्टता प्रदान करता है। कोर्ट ने साफ किया कि भूमि का उपयोग उसके मूल उद्देश्य के अनुसार ही आंका जाएगा, और प्रशासनिक आदेशों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।





