ग्वालियर जिले में बंदूकराज तेजी से पैर पसार रहा है। छोटी-छोटी बातों पर गोली चलने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जनवरी से 15 अगस्त 2025 तक जिले में 158 बार लाइसेंसी हथियारों से गोली चली, जो सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
जिले में हथियारों की संख्या
- ग्वालियर जिले में 33 हजार से अधिक हथियार लाइसेंस जारी हैं।
- गोलीबारी के मामलों में सबसे अधिक 315 बोर की बंदूक का उपयोग हुआ।
- 12 बोर की बंदूक और पिस्टल का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम रहा।
क्यों बढ़ रहा है 315 बोर का दुरुपयोग?
विशेषज्ञों के अनुसार, 315 बोर की बंदूक बदमाशों की पहली पसंद है। इसके पीछे ये कारण सामने आए हैं:
- इसमें कारतूस की मैग्जीन होती है, जिसमें एक साथ 5 राउंड लोड हो जाते हैं।
- बार-बार कारतूस भरने की जरूरत नहीं पड़ती।
- इसकी गोली से बच पाना लगभग असंभव होता है।
- जबकि 12 बोर की बंदूक में मैग्जीन नहीं होती और फायर करने की गति धीमी रहती है।
7 माह 15 दिन में 158 लाइसेंस रद्द
एसएसपी धर्मवीर सिंह की रिपोर्ट पर, अपराधों में उपयोग किए गए 158 हथियारों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। इनमें—
- 107 लाइसेंस: 315 बोर
- 45 लाइसेंस: 12 बोर
- 6 लाइसेंस: पिस्टल
अप्रैल और जुलाई में सबसे ज्यादा कार्रवाई
- जुलाई 2025: 49 हथियार लाइसेंस रद्द (29 – 315 बोर, 17 – 12 बोर)
- अप्रैल 2025: 48 हथियार लाइसेंस रद्द (36 – 315 बोर, 11 – 12 बोर)
गोली चलने के प्रमुख क्षेत्र
- हजीरा: 13 मामले
- महाराजपुरा: 14 मामले
- मुरार: 2 मामले
इन क्षेत्रों से सबसे ज्यादा लाइसेंस निरस्तीकरण के प्रस्ताव भेजे गए।
FIR और लाइसेंस निरस्तीकरण की सख्ती
पुलिस अब ऐसे मामलों में सिर्फ लाइसेंस रद्द ही नहीं कर रही, बल्कि तुरंत FIR भी दर्ज कर रही है। इससे अपराधों पर नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्वालियर में बढ़ते बंदूकराज ने प्रशासन और जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है। 315 बोर की बंदूक का आसान उपयोग और खतरनाक असर इसे अपराधियों का पसंदीदा हथियार बना रहा है। सरकार और प्रशासन लगातार लाइसेंस रद्द करने और FIR दर्ज करने जैसी कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे अपराधों पर लगाम लग पाएगी?





