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“जब जंजीरें टूटीं और हाथी हार गए – ग्वालियर के शिवलिंग का अद्भुत रहस्य”

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“जब जंजीरें टूटीं और हाथी हार गए – ग्वालियर के शिवलिंग का अद्भुत रहस्य”

BY: MOHIT JAIN

सावन का तीसरा सोमवार और हम आपको बताते हैं ग्वालियर की एक ऐसी अद्भुत गाथा, जिसने सैकड़ों सालों से भक्तों और इतिहासकारों को हैरान कर रखा है। शहर की व्यस्त सड़क के बीचों-बीच विराजमान है वह शिवलिंग, जिसे 100 हाथियों की ताकत भी नहीं हिला पाई। गहरी खुदाई करने पर पानी तो निकला, लेकिन इस शिवलिंग का छोर आज तक कोई नहीं खोज सका। यह है बाबा अचलेश्वर महादेव का रहस्यमयी मंदिर, जहां आस्था और चमत्कार का संगम दिखाई देता है।


बीच सड़क पर विराजमान अचलेश्वर महादेव

ग्वालियर के बीचों-बीच स्थित अचलेश्वर महादेव का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। मान्यता है कि यहां जो भी भक्त मत्था टेकता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।

  • सावन के हर सोमवार को हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
  • कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां भी यहां आकर बाबा अचलेश्वर का आशीर्वाद लेती हैं।
  • भक्तों का विश्वास है कि बाबा का वरदान उनकी प्रतिमा की तरह अचल रहता है।

750 साल पुरानी अद्भुत गाथा

अचलेश्वर महादेव की कथा लगभग 750 साल पुरानी है।

  • उस स्थान पर पहले एक पीपल का विशाल वृक्ष हुआ करता था।
  • विजयदशमी पर निकलने वाली शाही सवारी के रास्ते में यह पेड़ बाधा बनता था।
  • जब पेड़ हटाया गया, तो वहां एक स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ।

कहा जाता है कि

  • शासकों ने शिवलिंग को हटाने की कई कोशिशें कीं।
  • हाथियों और जंजीरों का सहारा लिया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
  • खुदाई करने पर पानी तो निकला, पर शिवलिंग का छोर कभी नहीं मिला।

बाद में राजा को सपने में आदेश मिला कि अगर शिवलिंग को नुकसान पहुंचाया गया तो सर्वनाश होगा। तभी से इस स्थान पर पूजा-अर्चना शुरू हुई और बाबा अचलेश्वर महादेव विराजमान हो गए।


भक्तों की आस्था और सुरक्षा व्यवस्था

सावन के पवित्र महीने में यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं।

  • पूरे मंदिर परिसर और सड़क पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं।
  • पुलिस बल के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी होती है।
  • हर सोमवार विशेष पूजन और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।

क्यों खास है अचलेश्वर महादेव

  • अचल शिवलिंग: जिसे हाथियों की ताकत भी नहीं हिला सकी।
  • मनोकामना सिद्धि स्थल: यहां दर्शन करने वाले की हर इच्छा पूरी होने की मान्यता है।
  • ऐतिहासिक महत्व: लगभग 750 साल पुरानी कथा से जुड़ा हुआ मंदिर।
  • भक्तों का केंद्र: सावन में लाखों श्रद्धालु और सालभर हजारों भक्त आते हैं।

सावन के तीसरे सोमवार पर ग्वालियर का अचलेश्वर महादेव मंदिर न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि आस्था और चमत्कार का अद्भुत संगम भी है। यदि आप सावन में भगवान शिव के दर्शन का संकल्प ले रहे हैं, तो बाबा अचलेश्वर के दरबार में जरूर पहुंचें और उनकी कृपा का लाभ उठाएं।

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