इस मंदिर में लगती है “शिव की अदालत”

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इस मंदिर में लगती है "शिव की अदालत"

BY: MOHIT JAIN

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से 15 किलोमीटर दूर गिरगांव गांव में एक अनोखा मंदिर है, जिसे ‘मजिस्ट्रेट महादेव’ कहा जाता है। यहां भगवान शिव की अदालत लगती है, जहां पारिवारिक झगड़े, सामाजिक विवाद और गंभीर अपराधों की भी सुनवाई होती है।

यह परंपरा केवल आस्था नहीं, बल्कि लोगों के बीच न्याय का केंद्र बन चुकी है—जहां धर्म की कसमें खाकर सत्य को सामने लाया जाता है और फैसला होता है।


क्यों कहते हैं ‘मजिस्ट्रेट महादेव’?

  • मंदिर में लगे साइनबोर्ड पर साफ लिखा है: “मजिस्ट्रेट महादेव”
  • यहां भक्त अपने विवाद लेकर आते हैं, जैसे कोई कोर्ट में जाता है।
  • भगवान शिव को जज मानकर पंचों की मौजूदगी में सुनवाई होती है।
  • सबूत, गवाह और पक्षकारों की बात सुनकर पंच महादेव की ओर से निर्णय लेते हैं।

कौन-कौन आते हैं इस अदालत में?

  • सिर्फ ग्वालियर या मध्य प्रदेश से नहीं, बल्कि मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान से भी लोग यहां केस लेकर आते हैं।
  • हिंदू ही नहीं, मुस्लिम समुदाय के लोग भी इस मंदिर में विवादों का हल ढूंढते हैं।

फैसला कैसे होता है?

  1. केस आने पर 11 पंचों की समिति बनाई जाती है।
  2. सुनवाई में दोनों पक्षों से सबूत और गवाह मांगे जाते हैं।
  3. पंचों द्वारा शिवलिंग के पास धर्म की कसम दिलाई जाती है।
  4. पंच महादेव की तरफ से फैसला सुनाते हैं, जिसे रजिस्टर में दर्ज किया जाता है।

मंदिर से जुड़े तीन चर्चित किस्से

1. मुंबई के दो भाइयों का सोने का विवाद

2024 में मुंबई के दो भाइयों के बीच आधा किलो सोने के बंटवारे को लेकर झगड़ा हुआ। केस महादेव की अदालत में लाया गया। धर्म की कसम के बाद बड़े भाई को 2 लाख रुपए का नुकसान हुआ, जिससे उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने छोटे भाई को हक सौंप दिया।

2. मुस्लिम समुदाय का मामला

12 जुलाई 2025 को मुस्लिम समुदाय के सलीम शाह ने चोरी का आरोप लगाया। पंचों ने निर्णय लिया कि 5 दिन में आरोपी को कोई आर्थिक नुकसान हो तो उसे दोषी माना जाएगा। फैसला सभी ने स्वीकारा।

3. मिर्ची बाबा की गिरफ्तारी

2022 में मिर्ची बाबा ने मंदिर में भागवत कथा के लिए चंदा लिया और कसम खाई कि पैसे का गलत उपयोग नहीं किया। उसी रात उन्हें भोपाल पुलिस ने यौन उत्पीड़न के केस में गिरफ्तार कर लिया। जेल से छूटने के बाद सबसे पहले वह महादेव की शरण में लौटे।


मंदिर का इतिहास और विशेषताएं

  • गिरगांव का यह मंदिर हजारों साल पुराना बताया जाता है।
  • यहां शिवलिंग के साथ पूरा शिव परिवार विराजमान है।
  • सावन माह में विशेष तौर पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन को आते हैं।

मंदिर को मिली करोड़ों की जमीन

हाल ही में गांव के अशोक गुर्जर ने मंदिर को 1 करोड़ रुपए की कीमत वाली 3 बीघा जमीन दान दी। इस जमीन की रजिस्ट्री भगवान शिवशंकर के नाम की गई है।


हर धर्म के लोग करते हैं न्याय में विश्वास

गांव के मनोज बघेल बताते हैं कि मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में हिंदू-मुस्लिम सभी समुदायों के लोग विश्वास से आते हैं। इस अदालत में न्याय पाने का एक अलग ही आत्मिक अनुभव है।


आस्था और न्याय का मिलन

गिरगांव का ‘मजिस्ट्रेट महादेव’ मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रतीक बन चुका है। यहां आस्था और सत्य का संगम होता है, जहां बिना वकील, बिना सरकारी कोर्ट के लोग न्याय पाते हैं।

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