ग्वालियर के न्यू जयारोग्य अस्पताल (JAH) में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। ब्लड कैंसर से पीड़ित एक 70 वर्षीय मरीज ने अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित सर्जिकल वार्ड की खिड़की से तौलिया का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। मरीज की पहचान मुरैना निवासी रामकरण राठौर के रूप में हुई है।
कब और कैसे हुई घटना?
- तारीख: बुधवार रात
- स्थान: न्यू जेएएच अस्पताल, पांचवीं मंजिल, सर्जिकल वार्ड
- मृतक: रामकरण राठौर, उम्र 70 वर्ष, निवासी – नाहर सिंह यादव कॉलोनी, मुरैना
- बीमारी: ब्लड कैंसर
- अस्पताल में भर्ती: 1 जुलाई 2025
घटना के वक्त वार्ड में बाकी मरीज और परिजन सो रहे थे। इसी दौरान रामकरण ने अपने कमरे की खिड़की से तौलिया बांधकर जान दे दी। जब तक अस्पताल स्टाफ और परिजनों को पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पुलिस जांच और शुरुआती निष्कर्ष
घटना की जानकारी मिलते ही कंपू थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
थाना प्रभारी मदन मोहन मालवीय ने बताया:
“बुजुर्ग ब्लड कैंसर से पीड़ित था और लंबे समय से असहनीय दर्द झेल रहा था। प्रारंभिक जांच में लगता है कि बीमारी के तनाव और दर्द से तंग आकर आत्महत्या की गई है।”
परिवार का दर्द: इलाज के बाद भी नहीं मिली राहत
परिजनों ने बताया कि रामकरण का इलाज कई बड़े अस्पतालों में कराया गया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बीमारी के चलते वह मानसिक रूप से बेहद तनाव में रहते थे। उन्होंने कई बार अपनी तकलीफों का जिक्र किया था, पर दर्द दिन-ब-दिन बढ़ता गया।
यह घटना क्यों है अहम?
- अस्पतालों में भर्ती मरीजों की मानसिक स्थिति की निगरानी जरूरी है।
- गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मानसिक सहारा और काउंसलिंग की आवश्यकता होती है।
- यह घटना मेडिकल सिस्टम को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की सीख देती है।
रामकरण राठौर की आत्महत्या केवल एक व्यक्तिगत दुखद घटना नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल भी उठाती है। यह समय है कि अस्पतालों में शारीरिक इलाज के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी बराबर ध्यान दिया जाए।





