भारत में लिक्विड गोल्ड क्या है? | सोने का नया कानूनी लूपहोल और बड़ा खेल

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लिक्विड गोल्ड क्या है और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?

आपने येलो गोल्ड (पीला सोना), वाइट गोल्ड (सफेद सोना) और ब्लैक गोल्ड (पेट्रोलियम) के बारे में तो सुना ही होगा। लेकिन क्या कभी आपने “लिक्विड गोल्ड” के बारे में सुना है? भारत में पिछले कुछ सालों में इसका कारोबार हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर लोगों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं है।

इस लिक्विड गोल्ड के जरिए भारत में कानूनी लूपहोल्स का फायदा उठाकर भारी मुनाफा कमाया जा रहा है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर ये लिक्विड गोल्ड है क्या, भारत में इसे कैसे लाया जाता है और इसमें छुपा असली खेल क्या है।


क्या है लिक्विड गोल्ड? (What is Liquid Gold?)

लिक्विड गोल्ड असल में कोई आम सोना नहीं, बल्कि सोने का एक स्पेशल कंपाउंड है। इसमें सोने के साथ अन्य केमिकल एलिमेंट्स भी मिलाए जाते हैं। यह मुख्य रूप से इंडस्ट्रियल प्रोसेस में इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें मौजूद सोने की मात्रा की वजह से इसे भारत में एक अलग मकसद से भी लाया जा रहा है।


लिक्विड गोल्ड पर क्यों नहीं लगती भारी ड्यूटी?

भारत ने कुछ देशों जैसे:

  • यूएई (UAE)
  • जापान
  • ऑस्ट्रेलिया

के साथ ऐसे व्यापार समझौते किए हैं, जिनके तहत कुछ खास उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी या तो बिल्कुल नहीं लगती या बेहद कम होती है। लिक्विड गोल्ड इन्हीं में से एक है।

जहां आम सोने पर भारी इंपोर्ट ड्यूटी चुकानी पड़ती है, वहीं इस गोल्ड कंपाउंड पर बेहद कम या जीरो ड्यूटी लगती है। यहीं से शुरू होता है खेल।


कैसे हो रहा है लिक्विड गोल्ड का खेल?

  • लिक्विड गोल्ड को कानूनी तरीके से कम ड्यूटी पर भारत में इंपोर्ट किया जाता है।
  • इसे छोटी रिफाइनरीज में प्रोसेस किया जाता है।
  • प्रोसेस के बाद इसमें से शुद्ध सोना निकाला जाता है।
  • इस शुद्ध सोने को बाजार में सामान्य सोने की तरह बेचा जाता है, जिससे भारी मुनाफा कमाया जाता है।

यानी इस प्रोसेस में किसी तरह की स्मगलिंग या चोरी की जरूरत नहीं पड़ती। पूरा खेल कागजों पर कानूनी तरीके से होता है, लेकिन असल में ये भारत के सोने के बाजार पर बड़ा असर डाल रहा है।


आंकड़े जो चौंका देंगे (Liquid Gold Import Data)

बीते कुछ सालों में भारत में लिक्विड गोल्ड के इंपोर्ट में जबरदस्त उछाल आया है। एक नजर आंकड़ों पर:

वर्षइंपोर्ट मात्रा (किलोग्राम में)
2020-212,143
2021-222,167
2022-236,395
2023-2423,991
2024-25*1,27,886

*2024-25 का आंकड़ा अभी सिर्फ जनवरी से मार्च तक का है, यानी पूरा साल बाकी है।

सिर्फ 3 महीनों में ही 69,879 किलोग्राम लिक्विड गोल्ड भारत में आ चुका है, जिसकी कुल कीमत $1.29 बिलियन (करीब 10,800 करोड़ रुपये) है।


असली सोने पर क्या असर पड़ रहा है?

जहां लिक्विड गोल्ड का इंपोर्ट तेजी से बढ़ रहा है, वहीं असली सोने के इंपोर्ट में गिरावट दर्ज की गई है:

  • पिछले साल के मुकाबले असली गोल्ड का इंपोर्ट 0.9% घटा।
  • पिछली तिमाही में इसमें 51.2% की गिरावट आई।

विशेषज्ञ मानते हैं कि लिक्विड गोल्ड कहीं न कहीं असली सोने का विकल्प बनता जा रहा है। इससे भारत के सोने के बाजार पर भी असर पड़ रहा है।


सरकार और कस्टम विभाग क्या कर रहे हैं?

कानूनन देखें तो फिलहाल इस पर कोई रोक नहीं है। क्योंकि:

  • यह इंपोर्ट भारत के व्यापार समझौतों के तहत कानूनी रूप से हो रहा है।
  • कागजों पर सबकुछ सही है।

लेकिन जिस तरह से इसमें से प्रोसेस करके शुद्ध सोना निकाला जा रहा है, वह सरकार और कस्टम अधिकारियों के लिए चिंता का विषय है।

संभावना है कि आने वाले समय में:

  • इस पर नई ड्यूटी लगाई जा सकती है।
  • व्यापार समझौतों की शर्तें कड़ी की जा सकती हैं।
  • कस्टम विभाग इस पर निगरानी बढ़ा सकता है।

क्या कहना है जानकारों का?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह एक बड़ा “टैक्स लूपहोल” है। भारत जैसे देश में जहां सोने की खपत ज्यादा है, वहां इस तरह के रास्तों का गलत फायदा उठाया जा सकता है।

लिक्विड गोल्ड:

✔ कानूनी तरीके से आ रहा है
✔ लेकिन इसका इस्तेमाल टैक्स चोरी जैसा असर पैदा कर रहा है
✔ सरकार को जल्द कोई ठोस कदम उठाना जरूरी है


निष्कर्ष: क्या होना चाहिए आगे?

लिक्विड गोल्ड पर सरकार को तुरंत नजर रखने की जरूरत है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो:

  • भारत के सोने के बाजार में असंतुलन आ सकता है।
  • टैक्स कलेक्शन पर असर पड़ेगा।
  • सोने की कीमतों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

आपकी क्या राय है? क्या सरकार को इस पर सख्त कदम उठाना चाहिए? क्या इस तरह के लूपहोल्स का फायदा उठाना सही है?

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