Report: Prem Shrivastva
Jamshedpur बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपड़ा-नागुड़साई इलाके में पिछले कुछ दिनों से दहशत का माहौल था, जिसे भारतीय सेना की 51 इंजीनियर रेजिमेंट ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से समाप्त कर दिया। स्वर्णरेखा नदी के तट पर मिला यह विशालकाय बम दशकों पुराना होने के बावजूद विनाशकारी क्षमता रखता था।
Jamshedpur द्वितीय विश्व युद्ध के समय का था बम: नियंत्रित विस्फोट से किया नष्ट
सेना की बम निरोधक टीम ने कैप्टन आयुष कुमार सिंह और नायब सूबेदार आनंद स्वरूप सिंह के नेतृत्व में इस चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम दिया। विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में पता चला कि यह बम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान का है। इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए टीम ने इसे हिलाने के बजाय एक गहरे गड्ढे में नियंत्रित विस्फोट (Controlled Explosion) के जरिए सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया।
Jamshedpur सुरक्षा के कड़े इंतजाम: पूरे इलाके को किया गया था सील
बुधवार सुबह से ही प्रशासन ने स्वर्णरेखा नदी के आसपास के पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया था। सुरक्षा कारणों से नदी तट और आसपास के गांवों की ओर जाने वाले रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया गया था। लाउडस्पीकर के माध्यम से ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की हिदायत दी गई थी ताकि किसी भी अप्रत्याशित झटके या मलबे से कोई नुकसान न हो।
Jamshedpur दहशत का अंत: ग्रामीणों ने सेना का जताया आभार
पिछले दो दिनों से बम मिलने की खबर से आसपास के गांवों के लोग बेहद डरे हुए थे। मंगलवार को मंजूरी के अभाव में ऑपरेशन टल जाने से चिंता और बढ़ गई थी, लेकिन बुधवार को जैसे ही नियंत्रित विस्फोट के साथ बम के निष्क्रिय होने की पुष्टि हुई, ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। लोगों ने इस संभावित त्रासदी को टालने के लिए भारतीय सेना और जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया।





