मध्यप्रदेश में XFG कोविड वेरिएंट का दबदबा, निंबस स्ट्रेन नहीं मिला: एम्स भोपाल

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XFG कोविड वेरिएंट

भोपाल, 24 जून 2025: एम्स भोपाल की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मध्यप्रदेश में कोविड-19 का नया XFG वेरिएंट सबसे ज़्यादा फैल रहा है। वहीं, जिस NB.1 (निंबस वेरिएंट) को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ‘वेरिएंट अंडर मॉनिटरिंग’ श्रेणी में रखा है, उसकी राज्य में कोई मौजूदगी नहीं पाई गई है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें

  • एम्स भोपाल स्थित रीजनल वायरोलॉजी लैबोरेटरी ने मई से जून 2025 के बीच कोरोना पॉजिटिव पाए गए कुल 44 सैंपल्स की जीनोमिक सीक्वेंसिंग की।
  • ये सैंपल्स भोपाल (14), ग्वालियर (22), टीकमगढ़ (2) और इंदौर, खरगोन, छिंदवाड़ा, ललितपुर, सीधी और गया से (1-1) लिए गए थे।
  • जांच में सामने आया कि XFG वेरिएंट 44 में से 28 सैंपल्स में मौजूद था, यानी करीब 63.6% मामलों में यही स्ट्रेन मिला
  • यह वेरिएंट पुराने LF.7 वेरिएंट से विकसित हुआ है, जिसे मई 2025 में पहली बार पहचाना गया था।

XFG वेरिएंट के बारे में विस्तार से

  • मई के मध्य में इस वेरिएंट के मामले सामने आने शुरू हुए थे, जो जून की शुरुआत तक तेजी से बढ़े और जून के अंत तक राज्य में लगभग अकेला प्रमुख वेरिएंट बन गया
  • इसके अलावा XFG.3 नाम का नया सब-वेरिएंट भी सामने आया है, जो XFG से ही विकसित हुआ है और यह 28 में से 5 सैंपल्स में पाया गया।
  • वहीं, पहले मई में 50% मामलों में पाया जाने वाला LF.7 वेरिएंट जून के अंत तक पूरी तरह गायब हो गया।

क्या यह वेरिएंट खतरनाक है?

  • एम्स भोपाल के अनुसार, XFG और LF.7 दोनों वेरिएंट टीकाकरण करा चुके लोगों को भी प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन अभी तक इनसे केवल हल्के या बिना लक्षण वाले संक्रमण ही सामने आए हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अभी तक इन दोनों को ना तो ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’ और ना ही ‘वेरिएंट अंडर मॉनिटरिंग’ की श्रेणी में रखा है।

एम्स भोपाल निदेशक का बयान

एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने कहा,

“हमारी वायरोलॉजी लैब वैज्ञानिक मानकों के अनुसार सतर्कता से काम कर रही है, ताकि कोई भी नया वायरस वेरिएंट अनदेखा ना रह जाए। XFG जैसे वेरिएंट्स की शुरुआती पहचान से हमें वायरस के व्यवहार को समझने और समय पर सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी कदम उठाने में मदद मिलती है।”

लगातार जीनोमिक निगरानी की जरूरत

एम्स भोपाल ने कहा है कि कोरोना संक्रमण और नए वेरिएंट्स पर नजर रखने के लिए नियमित जीनोमिक सीक्वेंसिंग बेहद जरूरी है। यह तरीका न केवल संभावित खतरों की समय रहते पहचान करने में मदद करता है, बल्कि भविष्य में संक्रमण की नई लहरों से निपटने की तैयारी भी मजबूत करता है।


🔎 निष्कर्ष

  • मध्यप्रदेश में फिलहाल निंबस वेरिएंट की मौजूदगी नहीं।
  • XFG वेरिएंट का दबदबा बढ़ता दिख रहा है, पर अभी यह घातक नहीं माना जा रहा।
  • एक्सपर्ट्स का सुझाव: लक्षण नजर आएं तो तुरंत जांच कराएं, और प्रशासन द्वारा दिए जा रहे कोविड दिशानिर्देशों का पालन करें।

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