BY
Yoganand Shrivastava
Mumbai महाराष्ट्र के शहरों और ग्रामीण इलाकों में बंदरों के बढ़ते आतंक से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक अनूठा, लेकिन विवादास्पद फैसला लिया है। सरकार द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, अब बंदर पकड़ने वाले व्यक्ति को प्रति वानर 600 रुपये का इनाम दिया जाएगा। 22 अप्रैल 2026 को जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य रिझस मकाक और हनुमान लंगूरों की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाले हमलों पर अंकुश लगाना है।

Mumbai पिंजरे में कैद होगी फोटो, फिर जंगल में मिलेगी आजादी
वन विभाग द्वारा तैयार की गई इस योजना के तहत बंदरों को पकड़ने के लिए जाल और पिंजरों का इस्तेमाल किया जाएगा। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पकड़े गए हर बंदर की फोटो लेना अनिवार्य होगा। इसके बाद:

- पकड़े गए बंदरों को शहर या रिहाइशी इलाकों से कम से कम 10 किलोमीटर दूर घने जंगलों में छोड़ा जाएगा।
- इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी स्थानीय वन अधिकारी करेंगे ताकि जानवरों को कोई नुकसान न पहुँचे।
Mumbai मात्र 600 रुपये के लिए कौन लेगा जोखिम?
सरकार के इस फैसले पर अब आम लोगों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। चर्चा का मुख्य विषय 600 रुपये की कम प्रोत्साहन राशि है। लोगों का तर्क है कि:

- बंदरों को पकड़ना एक अत्यधिक जोखिम भरा काम है, जिसमें चोट लगने या जानलेवा हमले का खतरा रहता है।
- इतनी कम राशि के लिए पेशेवर लोग या आम जनता अपनी सुरक्षा को दांव पर लगाने से कतरा सकती है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मानव-वानर संघर्ष कम होने के बजाय और बढ़ सकता है क्योंकि अनाड़ी लोग बंदरों को उकसा सकते हैं।
Mumbai शिकारियों पर भी प्रशासन की पैनी नजर
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के येऊर जंगलों में बंदरों पर तीर से हमले की खबरें सामने आई थीं। पिछले महीने दो बंदर गंभीर रूप से घायल मिले थे, जिसके बाद वन विभाग ने दोषियों की जानकारी देने वाले को 25,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बंदरों को पकड़ने के नाम पर उनके साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।





