BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे आंतरिक घमासान ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। राज्यसभा में ‘आप’ के 10 सांसदों में से 7 ने सामूहिक रूप से बगावत करते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इनमें से 3 सांसद तुरंत भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं, जबकि 4 अन्य ने भी भगवा दल के साथ जाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। इस बड़ी राजनीतिक हलचल पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, ‘आगे-आगे देखिए होता है क्या’।

New Delhi राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल समेत कई दिग्गजों ने दिया झटका
पार्टी छोड़ने वाले नेताओं में राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे बड़े चेहरों के नाम शामिल हैं, जिन्हें अरविंद केजरीवाल का बेहद करीबी माना जाता था। इन सांसदों के पार्टी छोड़ने से न केवल राज्यसभा में ‘आप’ की ताकत आधी रह गई है, बल्कि पार्टी की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों ने नेतृत्व पर उपेक्षा और नीतियों में भटकाव का आरोप लगाया है, वहीं ‘आप’ ने इसे बीजेपी की ‘खरीद-फरोख्त’ वाली राजनीति करार दिया है।

New Delhi पंजाब चुनाव से पहले बदले सियासी समीकरण
यह सियासी उथल-पुथल ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वर्तमान में पंजाब में आम आदमी पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है, लेकिन राज्यसभा सांसदों के इस विद्रोह ने पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बना दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब से आने वाले सांसदों की यह बगावत मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है और इसका सीधा लाभ बीजेपी को आगामी चुनावों में मिल सकता है।
New Delhi राष्ट्रपति से मिलेंगे सीएम भगवंत मान, ‘रिकॉल’ की मांग
पार्टी में मची इस टूट को रोकने और बागी सांसदों पर कार्रवाई के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है। बताया जा रहा है कि मान पंजाब के विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सदस्यों को ‘रिकॉल’ (वापस बुलाने) संबंधी संवैधानिक प्रावधानों पर अपना पक्ष रखेंगे। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की राजनीति को गर्मा दिया है।
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