रिपोर्ट: रवि सेन
Banda ग्राम पंचायत बमाना के निवासी पिछले कई वर्षों से उपेक्षा का शिकार हैं। पंचम बांध परियोजना के तहत इस गांव को डूब क्षेत्र में शामिल किए जाने के बाद से यहां विकास के पहिए थम गए हैं। विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद आज भी यहां बड़ी आबादी निवास कर रही है, जिनके लिए मूलभूत सुविधाएं जुटाना चुनौती बना हुआ है।
Banda 2021 से ठप हैं विकास कार्य: सुविधाओं का अभाव
ग्रामीणों का आरोप है कि साल 2021 के बाद से गांव में एक भी नया विकास कार्य नहीं हुआ है। हैरानी की बात यह है कि विस्थापन के दावों के बीच आज भी यहां सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र और राशन की दुकान का संचालन हो रहा है। इसके बावजूद पेयजल और सड़कों जैसी बुनियादी जरूरतों की स्थिति बदतर है। ग्रामीण एक ओर विस्थापन के डर में जी रहे हैं, तो दूसरी ओर वर्तमान में मिल रही ‘नरकीय’ सुविधाओं से परेशान हैं।
Banda सरपंच की बेबसी: स्वीकृति के लिए भोपाल तक की दौड़
पंचायत के सरपंच का कहना है कि वे गांव की समस्याओं को लेकर लगातार पत्राचार कर रहे हैं। काम की स्वीकृति के लिए जिला पंचायत सीईओ से लेकर कलेक्टर और भोपाल मुख्यालय तक के चक्कर काटे जा रहे हैं, लेकिन डूब क्षेत्र का हवाला देकर विकास कार्यों को मंजूरी नहीं दी जा रही है। सरपंच का दावा है कि बिना प्रशासनिक अनुमति के विकास कार्य कराना संभव नहीं है, जबकि वे अपनी ओर से हर संभव प्रयास कर चुके हैं।
Banda जनपद सीईओ का नोटिस: पद से हटाने की चेतावनी
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब 18 मार्च को जनपद पंचायत सीईओ ने सरपंच को ही ‘कारण बताओ नोटिस’ थमा दिया। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पंचायत में उपलब्ध राशि के बावजूद निर्माण कार्य नहीं कराए जा रहे हैं। सीईओ ने सरपंच को चेतावनी दी है कि क्यों न उनके विरुद्ध पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत पद से पृथक करने की कार्यवाही की जाए। अब सवाल यह उठता है कि जब एक तरफ स्वीकृति नहीं मिल रही, तो सरपंच कार्य कैसे कराएं?
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