अमेरिका राष्ट्रपति के चुनावओं बीते 5 नवम्बर को हुए थे। जिसमें डोनाल्ड ट्रम्प को बहुमत मिला था। बता दें कि चुनाव में किसी प्रत्याशी को 270 इलेक्टोरल वोट्स की जरूरत होती है लेकिन ट्रम्प को 312 वोट्स मिले थे। वहीं उनकी विरोधी कमला हेरिस को सिर्फ 226 इलेक्टोरल वोट्स मिले। जिससे यह तय हो गया था कि जीत ट्रम्प की ही तय है। लेकिन इसी आधिकारिण घोषणा 6 जनवरी को होने जा रही है। 6 जनवरी को अमेरिकी संसद कैपिटल हिल के जॉइंट सेशन में इलेक्टोरल कॉलेज के वोट गिने जाएंगे।
3 फेज में होते है चुनाव
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव 3 फेज में होते हैं राज्यों के प्रतिनिधि मिलकर राष्ट्रपति चुनते हैं अमेरिका में जनता इलेक्टर्स ;राज्यों के प्रतिनिधिद्ध चुनती है। ये इलेक्टर्स पॉपुलर वोट यानी कि जनता के वोट के आधार पर चुने जाते हैं। जब जनता वोट करती है तो वह सीधे राष्ट्रपति को वोट नहीं करती हैए बल्कि वह अपने राज्य के इलेक्टर्स को वोट देते हैं। कई इलेक्टर्स मिलकर ही इलेक्टोरल कॉलेज बनाते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज ही राष्ट्रपति चुनता है। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में 538 इलेक्टर्स चुने जाते हैं। सभी राज्यों से चुने गए इलेक्टर्स की संख्या अलग.अलग होती है। यहां रोचक बात यह है कि अमेरिकी चुनाव में ‘विनर टेक ऑलश् सिस्टम काम करता है। इसका मतलब है कि अगर किसी कैंडिडेट को एक राज्य में 50ः से ज्यादा पॉपुलर वोट मिल जाते हैंए तो तो उस राज्य के तमाम इलेक्टोरल वोट उसी कैंडिडेट को मिले हुए माने जाते हैं। जैसे ट्रम्प को पेन्सिलवेनिया में सबसे ज्यादा लोगों ने वोट किया तो वहां के सारे इलेक्टर्स ;19द्ध ट्रम्प को मिल गए। इलेक्टर्स का राष्ट्रपति चुनने के अलावा कोई काम नहीं इलेक्ट्रोरल कॉलेज एक चुनावी संस्था है जो अमेरिका के राष्ट्रपति और उप.राष्ट्रपति को चुनने के लिए गठित की गई है।
कमला हैरिस की अध्यक्षता में होगी वोटों की गिनती
दिसंबर के महीने में इलेक्टोरल कॉलेज की बैठक होती है। इसमें हर राज्य के चुने हुए इलेक्ट्रर्स अपनी.अपनी काउंटी या राज्य में मिलते हैं और राष्ट्रपति के लिए औपचारिक तौर पर वोटिंग करते हैं। इलेक्टोरल वोटों को राज्य के चुनाव अधिकारी प्रमाणित करते हैं और फिर इन वोटों को कांग्रेस को भेजा जाता है। अगली 6 जनवरी को कैपिटल हिल यानी अमेरिकी संसद में दोनों सदन {सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स} इकट्ठा होते हैं। अमेरिकी सीनेट के अध्यक्ष उपराष्ट्रपति होते हैं। अभी यह पद कमला हैरिस के पास है, इसलिए वही इक्टोरल कॉलेज के वोटों की गिनती शुरू करेंगी। उन्हें हर राज्य के चुनाव रिजल्ट्स को पढ़ने के लिए दस्तावेज मिलेगा। उपराष्ट्रपति जब इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों को पढ़ती हैं, तो उसे रिकॉर्ड भी किया जाता है। अगर यदि कोई आपत्ति उठती है, तो उसे दोनों सदनों में विचार किया जाता है।
शपथ से पहले जो बाइडेन से मिलने जाएंगे ट्रम्प
जब सभी वोटों की गिनती पूरी हो जाती हैए तो यह घोषणा की जाती है कि कौन राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए 270 इलेक्टोरल वोट हासिल करना जरूरी है। अगर भारत से तुलना करें तो जैसे सांसदों के वोट से प्रधानमंत्री का चुनाव होता हैए ठीक उसी तरह इलेक्टर्स के वोट से अमेरिका में राष्ट्रपति चुना जाता है। हालांकि भारत के सांसदों के उलट अमेरिका के इलेक्टर्स का राष्ट्रपति चुनने के अलावा और कोई काम नहीं है।





