Isa Ahmad
DMF Fund Misuse: महासमुंद जिले में खनिज न्यास निधि (DMF) से खर्च की गई राशि को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ‘गढ़कलेवा’ को हटाकर ‘पालना घर’ विकसित करने के नाम पर करीब 10 लाख रुपये के उपयोग में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व पार्षद पंकज साहू द्वारा की गई शिकायत के अनुसार, तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर इस परियोजना के लिए ₹9,99,133 की राशि स्वीकृत की गई थी। लेकिन खर्च के दौरान वित्तीय नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के एक तत्कालीन अधिकारी ने अपने ही नाम पर ₹32,500 का भुगतान लिया, जबकि जिला बाल संरक्षण अधिकारी के नाम पर ₹75,000 और ₹94,069 की राशि अग्रिम चेक और RTGS के माध्यम से निकाली गई।
DMF Fund Misuse: मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जिसे सप्लायर के रूप में दिखाकर एयर कंडीशनर, CCTV और बिजली उपकरणों की खरीदी के नाम पर ₹2,65,590 का भुगतान किया गया।
DMF Fund Misuse: लगभग 10 लाख की राशि में अनियमितता, बिना टेंडर के खरीदी पर उठे सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 32 इंच की LED टीवी अलग-अलग वेंडरों से अलग-अलग कीमतों पर खरीदी गई। एक ओर दाऊ अप्लायंसेज से ₹19,200 में टीवी खरीदी गई, वहीं दूसरी ओर एक गैर-ब्रांडेड टीवी के लिए ₹35,714 का भुगतान किया गया।
पूरे मामले में टेंडर प्रक्रिया और भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया। किचन सामग्री, फर्नीचर और सजावट के नाम पर मनमाने बिल लगाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग करने का आरोप है।
DMF Fund Misuse: शिकायतकर्ता पंकज साहू ने आरोप लगाया है कि DMF फंड के करोड़ों रुपये इसी तरह खर्च किए गए हैं। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत केस दर्ज कराने की बात कही है।
DMF Fund Misuse: शिकायत के बाद जांच की मांग तेज, विभाग ने पारदर्शिता का किया दावा
वहीं, महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पालना घर की खरीदी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। विभाग का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत सभी जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं और जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा जाएगा।
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अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते हैं या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाता है।





