Dr Ambedkar: भोपाल में विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश द्वारा डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती के अवसर पर “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और डॉ. अंबेडकर” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने अंबेडकर के विचारों को वर्तमान संदर्भ में रखते हुए सामाजिक समरसता और उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की।
Dr Ambedkar: संघ की शाखा में अंबेडकर का अनुभव
मुख्य वक्ता अशोक पांडेय ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि 2 जनवरी 1940 को सतारा के कराड में डॉ. अंबेडकर संघ की शाखा में गए थे, जहां उन्होंने सामाजिक समरसता का अनुभव किया। ‘केसरी’ समाचार पत्र के हवाले से उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने संघ के कार्यों की सराहना भी की थी, भले ही कुछ बातों पर मतभेद रहे हों।
Dr Ambedkar: समता और समरसता में अंतर
अशोक पांडेय ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि कानून के माध्यम से समता स्थापित की जा सकती है, लेकिन समरसता केवल आपसी आत्मीयता और बंधुत्व से ही संभव है। उन्होंने संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार और बाद के नेतृत्व द्वारा सामाजिक एकता के प्रयासों को भी रेखांकित किया।
Dr Ambedkar: अंबेडकर के विचारों की व्यापकता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रकाश बरतूनिया ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का व्यक्तित्व अत्यंत व्यापक था। उन्होंने बताया कि अंबेडकर ने विश्व के कई संविधानों का अध्ययन किया और भारतीय दर्शन को आत्मसात किया। उनके विचारों में भारतीय जीवन मूल्यों की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।
Dr Ambedkar: किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं अंबेडकर
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए लोकेंद्र सिंह ने कहा कि डॉ. अंबेडकर को किसी एक विचारधारा तक सीमित करना उचित नहीं है। उन्होंने अंबेडकर को बहुआयामी चिंतक बताते हुए कहा कि उन्होंने धर्म, अर्थव्यवस्था, राष्ट्र और समाज जैसे कई विषयों पर गहन अध्ययन किया।
Dr Ambedkar: अध्यक्षीय उद्बोधन में अंबेडकर को बताया ‘युगनायक’
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लाजपत आहूजा ने अपने संबोधन में डॉ. अंबेडकर को “युगनायक” बताते हुए उनके विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए अंबेडकर के विचार मार्गदर्शक हैं।
Dr Ambedkar: कार्यक्रम में साहित्य प्रदर्शनी और विमोचन
कार्यक्रम के दौरान अंबेडकर साहित्य का स्टॉल भी लगाया गया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। साथ ही “हिंदू गर्जना” के गो-विशेषांक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन सृष्टि झा ने किया और आभार प्रदर्शन लक्ष्मेंद्र माहेश्वरी ने किया।
Dr Ambedkar: बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति
इस आयोजन में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए। कार्यक्रम ने सामाजिक समरसता और विचार विमर्श के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में अपनी पहचान बनाई।





