Red Sea oil route: सऊदी अरब ने भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को छोड़कर लाल सागर मार्ग का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यानबू से रवाना हुए कई टैंकर भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव और ईरान के हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है।
Red Sea oil route: होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा

मध्यपूर्व में जारी संघर्ष और ईरान के मिसाइल व ड्रोन हमलों के चलते होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। आम तौर पर दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का व्यापार इसी मार्ग से होता है। खाड़ी देशों से भारत के ऊर्जा आयात का मुख्य रास्ता भी यही है।
Red Sea oil route: लाल सागर मार्ग से सप्लाई
Kpler के डेटा के अनुसार, वर्तमान में चार सऊदी टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें लगभग 60 लाख बैरल तेल भरा गया है। महीने के अंत तक अतिरिक्त 90 लाख से 1 करोड़ बैरल तेल भारत पहुंचने की संभावना है। यानबू से भारत तक यह तेल पाइपलाइन के जरिए जाएगा, जिसकी लंबाई लगभग 1200 किलोमीटर है।
Red Sea oil route: पाइपलाइन की सीमित क्षमता
हालांकि यह नया मार्ग राहत भरा है, लेकिन इसमें भी सीमाएं हैं। यानबू पाइपलाइन की क्षमता होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते जितनी नहीं है। इसलिए इस मार्ग से पूरी मात्रा में तेल नहीं भेजा जा सकता।
Red Sea oil route: लाल सागर मार्ग में जोखिम
लाल सागर मार्ग बाब अल मंदाब से होकर गुजरता है, जो यमन में ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों के हमलों के दायरे में आता है। इससे पहले इजरायल-हमास संघर्ष के दौरान हूतियों ने इसी मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमले किए थे। ऐसे हमलों के कारण जहाजों को लंबा और महंगा रूट अपनाना पड़ा। अगर इलाके में फिर से कोई हमला होता है, तो सप्लाई में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।





