,

OPS बनाम NPS: सरकारी आंकड़ों ने खोली हकीकत, NPS पेंशनर्स की संख्या बेहद कम

- Advertisement -
Ad imageAd image
OPS vs NPS

OPS: भारत में पुरानी पेंशन योजना (OPS) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में सामने आए सरकारी आंकड़ों ने इस बहस को और गहरा कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, देश में हर 139 OPS पेंशनर्स पर केवल 1 NPS पेंशनर है, जो दोनों योजनाओं के बीच बड़े अंतर को दर्शाता है।

OPS: 139 OPS पेंशनर्स पर सिर्फ 1 NPS पेंशनर, सामने आया बड़ा अंतर

यह आंकड़ा न सिर्फ NPS की सीमित पहुंच को दिखाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि नई पेंशन प्रणाली अभी भी व्यापक स्तर पर प्रभावी नहीं हो पाई है। गौरतलब है कि OPS में रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन मिलती है, जबकि NPS एक मार्केट-लिंक्ड स्कीम है, जिसमें पेंशन राशि निवेश के प्रदर्शन पर निर्भर करती है।

OPS: पेंशन व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस, कर्मचारियों में बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि OPS कर्मचारियों को स्थिर और सुनिश्चित आय देता है, जबकि NPS में जोखिम और अनिश्चितता बनी रहती है। यही कारण है कि कई राज्यों में OPS को फिर से लागू करने की मांग तेज हो रही है। वहीं, सरकार NPS को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में लगातार सुधार कर रही है।

READ ALSO: Iran refuses ceasefire: ईरानी विदेश मंत्री अराघची का बयान, कहा- ईरान ना तो युद्धविराम चाहता है, ना ही बातचीत करेगा

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि देश के लिए कौन-सी पेंशन प्रणाली ज्यादा बेहतर और टिकाऊ है। सुरक्षित OPS या निवेश आधारित NPS।