BY
Yoganand Shrivastava
Akola: महाराष्ट्र की राजनीति में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। वैचारिक रूप से एक-दूसरे की कट्टर विरोधी मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में मिलकर सत्ता का रास्ता चुना है। इस अप्रत्याशित गठबंधन ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
अकोट चुनाव नतीजे बने गठबंधन की वजह
Akola: अकोट नगर परिषद के हालिया चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। कुल 35 सीटों वाली नगर परिषद में 33 सीटों पर चुनाव हुए, जहां भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से दूर रही। सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा को सहयोगियों की जरूरत थी, जिसके बाद नए समीकरण बनने लगे।
‘अकोट विकास मंच’: सत्ता के लिए साझा मंच
Akola: मेयर पद पर भाजपा की माया धुले के चुने जाने के बाद ‘अकोट विकास मंच’ नाम से एक महागठबंधन का गठन किया गया। इस मंच को अकोला जिला प्रशासन के पास औपचारिक रूप से पंजीकृत भी कराया गया है। इस गठबंधन में भाजपा के साथ AIMIM, शिवसेना के दोनों गुट, एनसीपी के दोनों धड़े और प्रहार जनशक्ति पक्ष शामिल हैं। उद्देश्य स्पष्ट है—नगर परिषद में स्थिर सरकार और प्रशासनिक नियंत्रण।
विचारधारा से ऊपर सत्ता और विकास
Akola: इस गठबंधन ने इसलिए भी सबको चौंकाया है क्योंकि भाजपा जहां हिंदुत्व की राजनीति के लिए जानी जाती है, वहीं AIMIM अल्पसंख्यक हितों की मुखर आवाज रही है। दोनों दल आमतौर पर एक-दूसरे पर तीखे हमले करते रहे हैं, लेकिन अकोट में ‘विकास’ को प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने वैचारिक मतभेदों को पीछे छोड़ दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह गठबंधन स्थानीय राजनीति में सत्ता की अहमियत को दर्शाता है, जहां विचारधारा से ज्यादा संख्या और प्रभाव मायने रखते हैं।
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