Bhind दबोह मंडी में भ्रष्टाचार का खुला खेल: अवैध तुलाई से शासन को करोड़ों की चपत, बेहाल हैं अन्नदाता

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Bhind मध्य प्रदेश के ग्वालियर संभाग अंतर्गत आने वाली दबोह कृषि उपज मंडी इन दिनों अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का केंद्र बनी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े अनुशासन और पारदर्शिता के निर्देशों के बावजूद यहाँ के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर कार्य कर रहे हैं। आलम यह है कि मंडी प्रशासन की कथित अनदेखी और व्यापारियों की साठगांठ के चलते सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है, जबकि अपनी फसल लेकर आने वाला किसान बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

Bhind मंडी के बाहर समांतर बाजार: टैक्स चोरी का नया अड्डा

गेहूं उपार्जन के मौजूदा सीजन में दबोह मंडी के भीतर सन्नाटा और बाहर अवैध गतिविधियों की चहल-पहल देखी जा रही है। मंडी परिसर की बाउंड्री से सटे सड़क किनारे एक दर्जन से अधिक अवैध दुकानें संचालित हो रही हैं। ये अवैध खरीद केंद्र न केवल मंडी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि किसानों को गुमराह कर कम कीमतों पर फसल खरीद रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में शासन को मिलने वाले ‘मंडी शुल्क’ की सीधे तौर पर चोरी की जा रही है। ताज्जुब की बात यह है कि यह सब मंडी प्रभारी की नाक के नीचे हो रहा है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।

Bhind बोली में देरी और भीषण गर्मी का दोहरा वार

मंडी प्रांगण के भीतर नीलामी प्रक्रिया का कोई निश्चित समय तय नहीं है। अप्रैल की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में किसान घंटों तक बोली शुरू होने का इंतजार करते हैं। आरोप है कि मंडी अधिकारी जानबूझकर नीलामी में देरी करते हैं ताकि किसान परेशान होकर औने-पौने दामों पर बाहर बैठे बिचौलियों को अनाज बेचने पर मजबूर हो जाए। इसके अलावा, मंडी में न तो शीतल पेयजल की व्यवस्था है और न ही छाया के पर्याप्त इंतजाम। प्यास बुझाने के लिए भी किसानों को भटकना पड़ रहा है, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

Bhind जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते अधिकारी

जब इस भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के बारे में मंडी प्रभारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। वहीं, अन्य कर्मचारियों का कहना है कि वे हाल ही में नियुक्त हुए हैं और पिछली गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। अधिकारियों का यह टालमटोल वाला रवैया भ्रष्टाचार की जड़ों को और मजबूत कर रहा है। अब स्थानीय किसानों की निगाहें मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड पर टिकी हैं कि क्या बोर्ड इस राजस्व हानि पर संज्ञान लेगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई करेगा।

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