Mohit Jain
ACC Cement Cyber Fraud: ग्वालियर में एसीसी सीमेंट कंपनी के नाम पर साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) में पदस्थ डॉक्टर नीलेश शर्मा को सस्ती सीमेंट का लालच देकर ठगों ने 1.69 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी कर ली। ठगों ने खुद को एसीसी कंपनी का कर्मचारी बताकर फर्जी बिल और लेटर पैड के जरिए भरोसा जीत लिया।
डॉक्टर को ठगी का तब अहसास हुआ, जब तय समय पर सीमेंट नहीं पहुंची और कॉल करने पर आरोपी लगातार टालमटोल करने लगा। इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके तीन दिन बाद मुरार थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।
ACC Cement Cyber Fraud: मकान निर्माण के लिए चाहिए थी 700 बोरी सीमेंट
रिवर व्यू कॉलोनी स्थित राधाकृष्ण अपार्टमेंट में रहने वाले 42 वर्षीय डॉक्टर नीलेश शर्मा जेएएच में पदस्थ हैं। उनका सीपी कॉलोनी में नया मकान बन रहा है, जिसके लिए करीब 700 बोरी सीमेंट की जरूरत थी। बाजार में सीमेंट की कीमत करीब 300 रुपए प्रति बोरी थी, जबकि ऑनलाइन 245 रुपए प्रति बोरी में उपलब्ध बताई जा रही थी।

सस्ती कीमत देखकर डॉक्टर ने 30 दिसंबर को गूगल पर एसीसी सीमेंट कंपनी की वेबसाइट सर्च की और वहां दिए गए प्रोफार्मा फॉर्म में अपनी जानकारी भरकर इन्क्वायरी भेज दी।
खुद को कंपनी कर्मचारी बताकर किया संपर्क
इन्क्वायरी डालने के कुछ घंटों बाद डॉक्टर के मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एसीसी सीमेंट कंपनी का कर्मचारी बताया और ऑर्डर स्वीकार होने की जानकारी दी। उसने भरोसा दिलाया कि तय समय पर सीमेंट डिलीवर कर दी जाएगी।
ठग ने पहले आधी रकम अग्रिम भुगतान के रूप में जमा करने की शर्त रखी। भरोसे में आकर डॉक्टर ने 31 दिसंबर को बताए गए बैंक खाते में ऑनलाइन भुगतान कर दिया।
पूरा भुगतान कराते ही गायब हुआ ठग
जब सीमेंट तय समय पर नहीं पहुंची, तो 1 जनवरी को उसी व्यक्ति ने दोबारा कॉल कर बाकी रकम जमा करने को कहा। ठग ने कहा कि पूरा भुगतान होते ही सीमेंट रवाना कर दी जाएगी। डॉक्टर ने बिना शक किए कुल 1.69 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
इसके बाद जब सीमेंट नहीं आई और फोन करने पर जवाब टालने लगे, तब डॉक्टर को ठगी का अहसास हुआ।
ACC Cement Cyber Fraud: फर्जी लेटर पैड और बिल से बनाया भरोसा
ठगों ने एसीसी सीमेंट कंपनी के लेटर पैड पर तैयार किया गया फर्जी बिल भी डॉक्टर को भेजा था। बिल देखने के बाद डॉक्टर को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। लेकिन भुगतान के बाद लगातार टालमटोल और डिलीवरी न होने से मामला संदिग्ध लगा।

1930 पर शिकायत, मुरार थाने में केस
डॉक्टर ने 1 जनवरी को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर ई-एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद 3 जनवरी को मुरार थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी, जिस पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि बैंक खाते और कॉल डिटेल के आधार पर आरोपियों की तलाश की जा रही है।
पुलिस की अपील: गूगल से नंबर सर्च करना सबसे बड़ा खतरा
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कंपनी, बैंक या कस्टमर केयर का नंबर गूगल से सर्च कर सीधे संपर्क न करें। साइबर ठग फर्जी वेबसाइट और विज्ञापनों के जरिए अपना नंबर ऊपर दिखा देते हैं और लोगों को ठगी का शिकार बना लेते हैं।
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पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी करते समय केवल आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत डीलर से ही लेन-देन करें, ताकि साइबर ठगी से बचा जा सके।





