BY
Yoganand Shrivastava
पाकिस्तान में एक बार फिर आटे के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। सरकार की ओर से गेहूं पर दी जा रही सब्सिडी के बावजूद बाजार को स्थिर रखने के प्रयास नाकाम होते नजर आ रहे हैं। बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।
सरकारी गेहूं लेने से पीछे हटे मिल मालिक
रिपोर्ट्स के अनुसार, आटा मिल संचालकों ने सरकारी गोदामों से गेहूं उठाने से इनकार कर दिया है। उनका आरोप है कि फूड डिपार्टमेंट के अधिकारी गेहूं जारी करने के बदले अवैध रूप से पैसे मांग रहे हैं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
घूसखोरी के आरोपों से गहराया संकट
मिल मालिकों का कहना है कि प्रति बोरी गेहूं के लिए 1,000 से 1,200 पाकिस्तानी रुपये तक की मांग की जा रही है। इस वजह से वे खुले बाजार से महंगे दामों पर गेहूं खरीदने को मजबूर हैं, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
खुदरा बाजार में आटे के दाम आसमान पर
मौजूदा हालात में खुदरा बाजार में 5 किलोग्राम आटे का पैकेट 630 रुपये तक बिक रहा है। कुछ इलाकों में इसकी कीमत 650 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे आम परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल होता जा रहा है।
सब्सिडी वाले गेहूं में भी गड़बड़ी
सिंध प्रांत में हालात तब और खराब हो गए, जब आरोप लगे कि सब्सिडी पर मिलने वाला गेहूं खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इसमें कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की बातें भी सामने आ रही हैं।
मिल मालिकों में नाराजगी
आटा मिल संचालकों का कहना है कि इस तरह की अव्यवस्थाएं सप्लाई सिस्टम को कमजोर कर रही हैं और बाजार में कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है। इससे कीमतों पर नियंत्रण रखना और मुश्किल हो गया है।
इमरजेंसी बैठक में जताया विरोध
हालात की गंभीरता को देखते हुए हैदराबाद प्रेस क्लब में फ्लोर मिल ओनर्स सोशल वेलफेयर एसोसिएशन ने आपात बैठक बुलाई। बैठक में व्यापारियों को सब्सिडी व्यवस्था में शामिल किए जाने का विरोध किया गया और चेतावनी दी गई कि इससे बाजार में हेरफेर और कृत्रिम संकट बढ़ सकता है।





