BY
Yoganand Shrivastava
business news: ब्रिटेन की प्रतिष्ठित अल्ट्रा लग्जरी कार और एयरो इंजन निर्माता कंपनी रोल्स रॉयस भारत में अपने कारोबार को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह भारत को ब्रिटेन के बाहर अपना तीसरा “घरेलू बाजार” बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
कई क्षेत्रों में विस्तार का लक्ष्य
यह रणनीति जेट इंजन, नौसैनिक प्रणोदन प्रणाली, थल आधारित सैन्य सिस्टम और उन्नत इंजीनियरिंग जैसे अहम क्षेत्रों में मौजूद अवसरों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। कंपनी का मानना है कि भारत इन सभी क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास की बड़ी संभावना रखता है।
एयरो इंजन विकास पर खास फोकस
रोल्स रॉयस इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी साशी मुकुंदन ने बताया कि कंपनी की प्राथमिकता भारत में नई पीढ़ी के एयरो इंजन का विकास करना है। इसका उद्देश्य उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान कार्यक्रम के तहत भारत में बनने वाले फाइटर जेट को आधुनिक इंजन उपलब्ध कराना है।
अमेरिका और जर्मनी पहले से हैं होम मार्केट
ब्रिटेन के अलावा कंपनी अमेरिका और जर्मनी को भी अपना घरेलू बाजार मानती है। इन दोनों देशों में रोल्स रॉयस की मजबूत मौजूदगी है, जहां विनिर्माण इकाइयां और तकनीकी ढांचा पहले से स्थापित है।
भारतीय नौसेना को मिल सकती है तकनीकी मजबूती
मुकुंदन ने बताया कि रोल्स रॉयस भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिक प्रणोदन तकनीक में अहम भूमिका निभा सकती है। एएमसीए कार्यक्रम के तहत इंजन विकास से नौसैनिक प्रणोदन के क्षेत्र में भी भारत को लाभ मिल सकता है।
नीतिगत स्पष्टता और मजबूत इकोसिस्टम से प्रभावित कंपनी
कंपनी के अनुसार भारत के पास बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता, स्पष्ट नीतियां और रक्षा एवं औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने की साफ दिशा मौजूद है, जो निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाती है।
बड़े निवेश की तैयारी, राशि पर चुप्पी
रोल्स रॉयस ने संकेत दिए हैं कि यदि सभी स्थितियां अनुकूल रहीं तो भारत में किया जाने वाला निवेश काफी बड़ा होगा। हालांकि कंपनी ने निवेश की राशि का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसका प्रभाव व्यापक होगा और पूरी वैल्यू चेन के विकास में मदद करेगा।
रक्षा क्षेत्र में समझौते की तैयारी
कंपनी भारत की दो रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ समझौता ज्ञापनों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। इनमें एक समझौता अर्जुन टैंक के लिए इंजन निर्माण से जुड़ा होगा, जबकि दूसरा भविष्य के युद्धक वाहनों के लिए उन्नत इंजनों के विकास से संबंधित होगा।





