Isa Ahmad
REPORT- PRAVEEN PATEL
सोनभद्र जनपद के ओबरा थाना क्षेत्र स्थित बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में बड़ा हादसा सामने आया है। बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और भाजपा के जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी से कुछ ही दूरी पर पत्थर खदान धंसने से 15 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने जिला प्रशासन और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी खदान को लेकर पूर्व में दाखिल एक याचिका पर जिला अधिकारी बद्रीनाथ सिंह को रिपोर्ट देनी थी, लेकिन देरी करते हुए उन्होंने व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर अदालत को बताया था कि खनन कार्य मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। अब हादसे के बाद याचिका कर्ता के अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
जिलाधिकारी पर झूठा शपथ पत्र देने का आरोप
अधिवक्ता अभिषेक चौबे और विकास शाक्य ने बताया कि
- मे० कृष्णा माइनिंग वर्क्स की खदान 500 फीट से अधिक गहरी है।
- हाइट बेंचिंग नहीं की गई, जिससे जोखिम और बढ़ गया।
- पानी निकालकर फेरिटिक ज़ोन के नीचे खनन किया जा रहा था, जो ईसी शर्तों के पूरी तरह खिलाफ है।
इन सबके बावजूद जिलाधिकारी ने अदालत में खदान को मानक के अनुरूप बताकर झूठा शपथ पत्र दिया, जिसके बाद यह बड़ा हादसा हुआ। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि जिलाधिकारी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
सफेदपोशों पर पीएमएलए के तहत कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता विकास शाक्य ने कहा कि
- मे० कृष्णा माइनिंग के संचालक मधुसूदन सिंह के सफेदपोशों से नजदीकी संबंध हैं।
- सोनभद्र और मिर्जापुर में इनका अदृश्य कब्जा है।
- बालू खनन से शुरू हुआ प्रभाव अब पत्थर खदानों तक फैल चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि खनन क्षेत्र में वर्तमान समय में भ्रष्टाचार, राजनीतिक संरक्षण और बाहुबल का गठजोड़ काम कर रहा है। इसलिए इस पूरे रैकेट की जांच पीएमएलए एक्ट 2002 के तहत कराना आवश्यक है, क्योंकि सफेदपोश लोग कागजों में कभी साझेदार के रूप में सामने नहीं आते।
NGT ने लगाई दस हजार रुपये की पेनल्टी
एनजीटी द्वारा जिलाधिकारी की देरी और गलत जानकारी पर 10,000 रुपये जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट गलत और भ्रामक थी।
याचिका कर्ता का आरोप- जनता और अदालत को गुमराह किया गया
याचिका कर्ता ऋतिशा गोंड ने बताया कि
- 12 जुलाई 2024 को खदान की खतरनाक स्थिति के सभी साक्ष्यों के साथ याचिका दाखिल की गई थी।
- 4 नवंबर 2024 को अदालत ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया था।
इसके बावजूद जिलाधिकारी ने अदालत और जनता दोनों को गुमराह किया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि जनता नहीं जागी तो पर्यावरण असंतुलन के कारण आगे और भी बड़ी मौतें होंगी।
पीड़ित परिवारों को 50–50 लाख मुआवजे की मांग
याचिका कर्ता ने मृत मजदूरों के परिजनों को
- 50-50 लाख रुपये का मुआवजा,
- तथा सरकारी योजनाओं का लाभ तत्काल देने की मांग की है।
सोनभद्र का यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही, अवैध खनन और राजनीतिक संरक्षण के बड़े नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामला अब तेज़ी से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ रहा है।





