US: अमेरिका के 2026 मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका देते हुए प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। चुनाव में मिली हार के बाद अमेरिकी राजनीति में हलचल के बीच ट्रंप ने शेयर बाजार और लोगों के रिटायरमेंट फंड को लेकर डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा।
ट्रंप ने दावा किया कि चुनावी नतीजों का असर शेयर बाजार पर पड़ा है और बाजार को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के प्रयासों से बाजार पहले कभी नहीं देखे गए स्तर तक पहुंचा था, लेकिन चुनाव के परिणामों के बाद स्थिति बदल गई।
US: ट्रंप ने डेमोक्रेट्स को बताया बाजार की गिरावट का जिम्मेदार
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि चुनाव परिणामों के कारण शेयर बाजार ने अपने सबसे खराब दिनों में से एक का सामना किया। उन्होंने इस स्थिति पर निराशा जताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए काफी मेहनत की थी।
उन्होंने अमेरिकी नागरिकों के 401(k) रिटायरमेंट फंड का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसकी वैल्यू में भी गिरावट आई है। ट्रंप ने इसके लिए रिपब्लिकन पार्टी को जिम्मेदार मानने से इनकार किया और डेमोक्रेट्स पर आरोप लगाया।
President of the United States Donald Trump posts on Truth Social, “The Stock Market suffered one of the Worst Days in History based on the results of the Election. Such a sad thing to watch! It took so much work to get us to a level that no one has ever seen before, and then this. Your 401(k)s have, therefore, dropped. Remember, it wasn’t Republicans; it was Dumocrats…”— ANI (@ANI) November 6, 2026
अपने बयान में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए ‘Dumocrats’ शब्द का इस्तेमाल किया। यह ‘Democrats’ और ‘Dumb’ शब्दों को मिलाकर बनाया गया व्यंग्यात्मक संबोधन है। ट्रंप अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते रहे हैं।
हालांकि, शेयर बाजार के उपलब्ध आंकड़े ट्रंप के इस दावे से अलग तस्वीर दिखाते हैं। चुनाव के बाद 4 नवंबर को अमेरिकी बाजार में तेजी दर्ज की गई थी। एसएंडपी 500 में 1.6 फीसदी, नैस्डैक में 1.4 फीसदी और डॉव जोन्स में करीब 3 फीसदी की बढ़त रही थी। डॉव जोन्स 1,569 अंक से ज्यादा चढ़ा था।
US: डेमोक्रेटिक नेताओं की जीत पर ट्रंप ने उठाए सवाल
मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि राजनीतिक बदलाव का असर अक्सर तब दिखाई देता है, जब हालात काफी बिगड़ चुके होते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी शहर, राज्य या देश की स्थिति एक बार बहुत खराब हो जाए तो उसे दोबारा पहले जैसा बनाना मुश्किल हो सकता है।
ट्रंप ने लॉस एंजिल्स के चुनावी नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि स्पेंसर प्रैट चुनाव के अंतिम चरण तक पहुंचेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए इसे बेईमानी से भरा बताया।
न्यूयॉर्क के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने कहा कि वहां के एक व्यक्ति के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यूयॉर्क के लिए आगे सब कुछ अच्छा रहेगा। हालांकि, उनके इस बयान में चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।
US: पीट हेगसेथ की तारीफ में ट्रंप ने क्या कहा?
चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप ने अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ के काम की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हेगसेथ ने अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाया है। ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और रक्षा विभाग के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की।
ट्रंप ने अपने बयान में वेनेजुएला और ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला के साथ सैन्य कार्रवाई बेहद कम समय में पूरी हो गई और इसमें अमेरिकी सैनिकों की कोई जान नहीं गई।
ईरान के साथ जारी संघर्ष पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का स्ट्रेट्स पर नियंत्रण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में अब इन समुद्री रास्तों से अधिक तेल का परिवहन हो रहा है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि वहां हर महीने करीब 25 हजार लोगों की जान जा रही है। उन्होंने अमेरिकी नाकेबंदी को सफल बताते हुए दावा किया कि उनकी सरकार ने इस मोर्चे पर बड़ी कामयाबी हासिल की है।
वहीं, पीट हेगसेथ ने भी चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद ईरान के साथ संघर्ष और अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए अमेरिकी सुरक्षा और रक्षा क्षमता को मजबूत बनाए रखने की बात कही।
US: रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर ट्रंप ने किया बड़े समझौते का दावा
रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को लेकर भी डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त कराने के लिए जल्द ही कोई समझौता हो सकता है।
ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते का दायरा केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें यूरोप के अन्य देश भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे एक व्यापक समझौता बताते हुए कहा कि इससे सभी पक्षों को फायदा पहुंच सकता है।
ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार इस विवाद को समाप्त करने की दिशा में प्रयास कर रही है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे। हालांकि, अभी तक किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
US: पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव से मिले ट्रंप
एसोसिएटेड प्रेस और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव से मुलाकात की थी। यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है।
दिमित्रिएव की अमेरिका यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों से जुड़ा एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम की मेजबानी अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने की थी।
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में दिमित्रिएव के साथ हुई चर्चा का विवरण सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गुरुवार को उनकी यूक्रेनी अधिकारियों के साथ कोई बैठक नहीं हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने के लिए 10 और 11 नवंबर को अबू धाबी में अमेरिकी अधिकारियों की मध्यस्थता में वार्ता प्रस्तावित है। ऐसे में ट्रंप का ताजा बयान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
US: संसद में डेमोक्रेट्स के बहुमत से ट्रंप की बढ़ सकती हैं चुनौतियां
2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों में बहुमत हासिल किया है। इसके साथ ही ट्रंप के कार्यकाल के अगले दो वर्षों में अमेरिकी संसद में राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे।
जनवरी 2027 से नई संसद के कार्यभार संभालने के बाद डेमोक्रेटिक सांसद ट्रंप प्रशासन की नीतियों और फैसलों पर ज्यादा निगरानी रख सकेंगे। खासतौर पर ईरान के साथ युद्ध, विदेश नीति, आर्थिक फैसलों और रूस के साथ संबंधों को लेकर सरकार को संसद में सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
इस चुनावी नतीजे ने ट्रंप प्रशासन के सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब देखना होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप डेमोक्रेटिक बहुमत वाली संसद के साथ किस तरह काम करते हैं और आने वाले दिनों में उनकी सरकार की नीतियों पर इसका कितना असर पड़ता है।


