Report by: Shailendra Paray
Ratlam: मध्य प्रदेश के रतलाम में स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर दीपावली के अवसर पर अपनी अनूठी परंपरा के कारण देशभर में चर्चा का केंद्र बन जाता है। यहां मां महालक्ष्मी का श्रृंगार फूलों से नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की नकदी, सोने-चांदी के आभूषणों और बेशकीमती रत्नों से किया जाता है। दीपोत्सव के दौरान मंदिर का नजारा देखने लायक होता है। मां के दरबार में धन-संपदा का ऐसा वैभव दिखाई देता है, जिसे देखने के लिए मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु रतलाम पहुंचते हैं।
Ratlam: माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर की अलग पहचान
रतलाम शहर के माणक चौक में स्थित प्रसिद्ध श्री महालक्ष्मी मंदिर की दीपावली पर विशेष रौनक रहती है। दीपोत्सव के दौरान मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और मां के दरबार को नोटों की गड्डियों, सोने-चांदी के आभूषणों तथा कीमती रत्नों से सजाया जाता है। मंदिर में इस दौरान आस्था और वैभव का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
यही वजह है कि दीपावली के दिनों में यह मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन जाता है। भक्त यहां मां महालक्ष्मी के दर्शन करने के साथ ही सदियों से चली आ रही इस परंपरा को करीब से देखने पहुंचते हैं।
Ratlam: 300 से 400 साल पुरानी बताई जाती है परंपरा
मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, मां महालक्ष्मी के दरबार को धन-संपदा से सजाने की यह परंपरा करीब 300 से 400 साल पुरानी है। इसे रतलाम रियासत के संस्थापक महाराजा रतन सिंह राठौर के शासनकाल से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि उस समय धनतेरस और दीपावली के अवसर पर राजपरिवार की ओर से मां महालक्ष्मी के चरणों में खजाना अर्पित किया जाता था।
इस परंपरा के पीछे सुख-समृद्धि, खुशहाली और राज्य की उन्नति की कामना जुड़ी हुई थी। समय के साथ यह परंपरा केवल राजपरिवार तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम श्रद्धालुओं की आस्था का हिस्सा बन गई।
Ratlam: दीपावली पर नकदी और सोने-चांदी से सजता है मां का दरबार
आज भी धनतेरस और दीपावली के अवसर पर श्रद्धालु मां महालक्ष्मी के चरणों में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और कीमती वस्तुएं अर्पित करते हैं। इनसे मंदिर के गर्भगृह और मां के दरबार को भव्य रूप दिया जाता है। दीपोत्सव के पांच दिनों तक मंदिर में विशेष सजावट की जाती है।
मां के दरबार में सजी नकदी और बेशकीमती आभूषणों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। मंदिर में उमड़ने वाली भीड़ के बीच श्रद्धालु मां महालक्ष्मी से सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।
Ratlam: कुबेर की पोटली भी है खास आकर्षण
श्री महालक्ष्मी मंदिर की एक अन्य खास परंपरा कुबेर की पोटली से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार, दीपावली के अवसर पर श्रद्धालुओं को श्रीफल के साथ सोने-चांदी के सिक्के और आभूषण प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं। भक्त इस प्रसाद को सुख-समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं।
कुबेर की पोटली को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। भक्त इसे मां महालक्ष्मी का आशीर्वाद मानकर अपने घर ले जाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
Ratlam: श्रद्धालुओं की संपत्ति का रखा जाता है पूरा हिसाब
इस मंदिर की परंपरा की सबसे खास बात यह है कि श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित की जाने वाली नकदी और आभूषणों का बाकायदा हिसाब रखा जाता है। दीपावली के बाद संबंधित श्रद्धालुओं को उनकी ओर से जमा कराई गई संपत्ति वापस लौटा दी जाती है। इस व्यवस्था के कारण भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मां के दरबार में धन और आभूषण अर्पित कर पाते हैं।
Ratlam: देशभर से दर्शन करने पहुंचते हैं श्रद्धालु
दीपावली के अवसर पर रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों के साथ ही अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। उज्जैन, इंदौर सहित कई स्थानों से भक्त मां के दर्शन करने आते हैं। मंदिर में होने वाली विशेष सजावट और वर्षों पुरानी परंपरा को देखने के लिए लोगों में खास उत्साह रहता है।
करीब 300 से 400 साल पुरानी मानी जाने वाली यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। करोड़ों की नकदी, सोने-चांदी के आभूषणों और कुबेर की पोटली से जुड़ी मान्यताओं के चलते रतलाम का श्री महालक्ष्मी मंदिर दीपावली पर देशभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
read also: Chanakya Niti on women : हर मजबूत स्त्री में होते हैं ये 5 गुण, चाणक्य के ये नियम बदल देंगे जिंदगी


