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UP News: क्या यूपी बीजेपी में जातीय असंतुलन सुलग रहा है, ठाकुरों के बाद ब्राह्मण विधायकों की बैठक से उठ रहे सवाल

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by: vijay nandan

UP News: उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी संगठन में क्या जातीय असंतुलन अंदर ही अदंर सुलग रहा है? राजनीतिक गलियारों में ये सवाल इसलिए गूंज रहा है क्योंकि कुछ दिनों पहले बीजेपी के ठाकुर विधायकों ने बंद कमरे में एक बैठक कर एकजुटता का प्रदर्शन किया। इस कवायद से दूसरी जाति के विधायकों में सुगबुगाहट चल ही रही थी कि उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के ब्राह्मण विधायकों ने भी एक बैठक कर डाली। इस बैठक ने तो पार्टी के भीतर जाति असंतुलन के सवालों को और मुखर कर दिया। इसे पार्टी में जातीय संतुलन को लेकर उभर रहे असंतोष के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी के अंदर इन बैठकों को कई सियासी जानकार इसे ठाकुर बनाम ब्राह्मण की राजनीति के तौर पर देख रहे हैं। जिसमें सत्ता में भागीदारी से लेकर संगठन में अपनी-अपनी जाति की हिस्सेदारी के लिए दबाव बनाने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी के लिए ब्राह्मण विधायकों की बैठक को हल्के में नहीं लिया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में पार्टी के अंदर ब्राह्मण समाज की भूमिका, उनके प्रतिनिधित्व और शक्ति को लेकर चर्चा की गई है, जिससे इस बात को बल मिलता दिख रहा है कि पार्टी में उनकी आवाज दब रही है जिससे उनमें असुरक्षा और असंतोष बढ़ रहा है।

UP News: ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद हलचल तेज

उत्तर प्रदेश में ठाकुर और ब्राह्मण वर्ग शुरू से ही बीजेपी को कोर वोट बैंक रहा है. बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि ब्राह्मणों की आवाज कमजोर हो ही है. हालांकि ये बात यूं ही नहीं उठी है. योगी सरकार पर कई बार ब्राह्मणों की अनदेखी आरोप भी लगे हैं. समाजवादी पार्टी भी गाहे बगाहे इसे हवा देते देखी जा सकती है और सरकार पर मुख्यमंत्री की जाति (ठाकुर) के लोगों को सरंक्षण देने और बचाने का आरोप भी लगाती रही है.

UP News यूपी की सत्ता में ब्राह्मण बनाम ठाकुर की हिस्सेदारी

खबरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी करीब 10 से 11% है, जबकि क्षत्रिय वर्ग लगभग 6 से 7% है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के कुल 258 विधायक हैं. इनमें से 42 ब्राह्मण, 45 ठाकुर, 84 OBC, 59 SC-ST, 0 मुस्लिम और 28 दूसरी ऊंची जातियों के विधायक है। जिनमें वैश्य, कायस्थ, पंजाबी और खत्री समेत अन्य जातियां शामिल हैं।

वहीं विधान परिषद् में बीजेपी के पास कुल 79 MLC हैं, जिनमें 14 ब्राह्मण, 23 ठाकुर, 26 OBC, 2 SC, 2 मुस्लिम और 12 दूसरी सवर्ण जातियां हैं। इन आंकड़ों पर नजर डाले तो जातीय समीकरणों के हिसाब से ब्राह्मणों की संख्या ठाकुरों से ज्यादा है, लेकिन विधानसभा और विधान परिषद् में राजपूतों के मुकाबले उनका प्रतिनिधित्व कम है।

जहां विधानसभा में बीजेपी के 42 ब्राह्मण विधायक है जबकि 45 ठाकुर विधायक हैं वहीं विधान परिषद् में भी क्रमशः सदस्यों की संख्या 14 और 23 है. इसी वर्ष मानसून सत्र के दौरान जब ठाकुर विधायकों की बैठक हुई तो इसे मुख्यमंत्री के प्रति एकजुटता दिखाने के तौर पर देखा गया लेकिन इस बार ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर पार्टी के ओर से उन्हें नसीहत दे दी गई है।

इन तमाम बातों को देखते हुए ये कयास लग रहे हैं बीजेपी के भीतर जातीय संतुलन को लेकर असंतोष उभर रहा है। पार्टी के सामने अब अपने सबसे बड़े दो कोर वोट बैंक में संतुलन साधना जरूरी हो गया है नहीं तो 2027 के विधानसभा चुनाव में इसके नतीजे हो सकते हैं।

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