Report: Vandna Rawat
Lucknow : उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे ढांचागत सुधारों और जमीनी स्तर पर जारी विशेष अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सूबे में नवजात शिशुओं से लेकर पांच वर्ष तक की आयु वाले बच्चों की मृत्यु दर (Child Mortality Rate) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के अपग्रेडेशन, बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन और समय पर टीकाकरण के चलते हजारों बच्चों को सुरक्षित जीवन मिला है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि जन्म के तुरंत बाद (शुरुआती 48 घंटों) होने वाली मौतों को रोकने के लिए प्रसवकालीन देखभाल को और अधिक मजबूत करना आगामी बड़ी चुनौती होगी।
Lucknow SRS रिपोर्ट: आंकड़ों में देखिए यूपी का सुधरता स्वास्थ्य स्तर
ताजा सर्वेक्षण प्रति 1,000 जीवित बच्चों के जन्म के पैमाने पर तैयार किया गया है, जिसके तुलनात्मक आंकड़े निम्नलिखित हैं:
- नवजात मृत्यु दर (NMR): वर्ष 2023 के सूचकांक 26 की तुलना में वर्ष 2024 में यह आंकड़ा घटकर 25 पर आ गया है।
- शिशु मृत्यु दर (IMR): पूर्व के 37 अंकों के मुकाबले इसमें दो अंकों का सुधार हुआ है और अब यह 35 रह गई है।
- बाल मृत्यु दर (Under-5 Mortality Rate): पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर भी 42 से घटकर अब 41 पर पहुंच गई है।
उत्तर प्रदेश अब देश के उन चुनिंदा राज्यों में शुमार हो गया है, जिसने बच्चों की मृत्यु दर के सभी आयु वर्गों और मानकों में निरंतर सुधार प्रदर्शित किया है।
Lucknow इन आधुनिक तकनीकों और पहलों ने बचाई मासूमों की जान
बदला जमीनी ढर्रा: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के मुताबिक, पिछले 3-4 वर्षों में प्राथमिक स्तर से लेकर जिला स्तर तक के चिकित्सा केंद्रों को अत्याधुनिक बनाया गया है। इसमें निम्नलिखित घटकों ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:
- सीपैप (CPAP) मशीनें: जन्म के समय जिन नवजात बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होती है, उनके लिए अस्पतालों में सीपैप मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
- कंगारू मदर केयर (KMC) व मिल्क बैंक: समय से पहले (प्री-मैच्योर) जन्मे कमजोर बच्चों के लिए कंगारू मदर केयर थेरेपी और ‘मिल्क बैंक’ (ह्यूमन मिल्क बैंक) जीवन रक्षक साबित हो रहे हैं।
- मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU): प्रसव के तुरंत बाद मां और शिशु को एक साथ एक ही वार्ड में रखने की इस नई व्यवस्था से बच्चों को तत्काल पोषण और सुरक्षा मिल रही है।
- नियमित टीकाकरण व मुफ्त दवाएं: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मुफ्त दवाओं के वितरण और शत-प्रतिशत नियमित टीकाकरण कवरेज से बाल मृत्यु दर नियंत्रित हुई है।
Lucknow आयुष्मान आरोग्य मंदिर से जिला अस्पतालों तक विशेष ट्रेनिंग
Lucknow वीरांगना अवंती बाई महिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान और स्टाफ नर्स डेजी रानी के अनुसार, जमीनी स्तर पर काम करने वाले चिकित्सा कर्मियों को कुशल बनाना टर्निंग पॉइंट रहा है:
- स्टाफ का कौशल विकास: आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में उप-स्वास्थ्य केंद्र/वेलनेस सेंटर) से लेकर जिला महिला अस्पतालों के डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को नवजात शिशु की विशेष देखभाल के लिए लगातार रिफ्रेशर और वर्चुअल ट्रेनिंग दी जा रही है।
- संक्रमण मुक्त प्रसव (Infection Control): पहले नवजात शिशुओं की एक बड़ी संख्या अस्वच्छता के कारण होने वाले सेप्सिस (संक्रमण) की भेंट चढ़ जाती थी। अब प्रसूता के डिलीवरी एरिया को पूरी तरह सैनिटाइज रखने, नवजात की नाल (Umbilical Cord) काटने वाले उपकरणों को स्टरलाइज करने और डॉक्टरों व नर्सों द्वारा अनिवार्य रूप से हाथ धोने के कड़े नियमों (हैंड हाइजीन प्रोटोकॉल) का पालन कराया जा रहा है।
- रेफरल प्रोटोकॉल: नर्सों को अब नवजात के खतरे के लक्षणों को समय रहते पहचानने और आपातकालीन स्थिति में तुरंत उच्च संस्थानों में ‘रेफरल प्रोटोकॉल’ के तहत भेजने की कमान सौंपी गई है, जिससे ‘गोल्डन ऑवर’ में बच्चों को सही इलाज मिल पा रहा है।





