BY
Yoganand Shrivastava
Khabar hatke उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से बकरीद (ईद-उल-अजहा) के मौके पर एक बेहद अनोखी और दिल छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ इस त्योहार पर पारंपरिक रूप से पशुओं की कुर्बानी देने की रवायत है, वहीं आगरा के एक मुस्लिम परिवार ने इस बार कुछ अलग और लीक से हटकर करने का फैसला किया। परिवार ने पशु बलि की जगह बकरे के चित्र (तस्वीर) वाला एक विशेष केक काटा और समाज से जीव हत्या रोकने की भावुक अपील की। इस अनूठे जश्न का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसे लेकर इंटरनेट पर नई बहस छिड़ गई है।
Khabar hatke शाहगंज के शेरवानी मार्ग पर आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम
यह पूरा मामला आगरा के शाहगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तिरंगा मंजिल, शेरवानी मार्ग का है:
- गुल चमन शेरवानी की पहल: यहाँ रहने वाले पेशे से वकील गुल चमन शेरवानी और उनके परिवार ने इस अनोखी मुहिम की शुरुआत की। उन्होंने अपने घर पर रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया।
- केक पर बनी थी बकरे की तस्वीर: इस मौके पर एक बड़ा केक मंगाया गया था, जिस पर बकरे की आकृति (तस्वीर) बनी हुई थी। पूरे परिवार ने मिलकर इस केक को काटा और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी।
Khabar hatke “दिखावा नहीं, नीयत देखते हैं अल्लाह”: एडवोकेट शेरवानी का संदेश
बलिदान का असली अर्थ: केक काटने के बाद मीडिया और समाज से बात करते हुए वकील गुल चमन शेरवानी ने इस पहल के पीछे का गहरा फलसफा समझाया। उन्होंने कहा, “अल्लाह कभी भी किसी दिखावे को पसंद नहीं करता, वह केवल इंसान की साफ नीयत को देखता है। सच्चा त्याग और बलिदान पशु की जान लेना नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों, लालच, नफरत और अहंकार को खत्म करना है।”
उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर में बहुत से लोग कुर्बानी के नाम पर महंगे पशु खरीदकर अपनी दौलत और रसूख का प्रदर्शन करते हैं, जो कि गलत है। एक गरीब या भीख मांगने वाला इंसान भी अपनी साफ और सच्ची नीयत से बड़ा से बड़ा आंतरिक बलिदान दे सकता है।
Khabar hatke सोशल मीडिया पर जमकर मिल रही तारीफ, मानवता की अपील
| सोशल मीडिया रिएक्शन | परिवार का मुख्य संदेश |
| प्रशंसा और समर्थन | इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर आते ही तेजी से ट्रेंड करने लगा। बड़ी संख्या में नेटिजंस और सोशल मीडिया यूजर्स इस मुस्लिम परिवार की सोच और हिम्मत की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि यह त्योहार मनाने का एक आधुनिक और मानवीय तरीका है। |
गुल चमन शेरवानी के इस कदम को कई बुद्धिजीवियों ने बकरीद के मूल संदेश (त्याग और समर्पण) को एक नए और सकारात्मक रूप में प्रस्तुत करने वाली प्रगतिशील सोच करार दिया है।
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