Kabir Das Ke Dohe संत कबीर के 10 प्रेरणादायक दोहे, जो जीवन को देते हैं सही दिशा

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भारत के महान संत और कवि Kabir Das की वाणी आज भी लोगों को जीवन जीने की सही राह दिखाती है। उनके दोहे केवल शब्द नहीं, बल्कि अनुभव और जीवन दर्शन का सार हैं। सरल भाषा में लिखे गए कबीर के दोहे मनुष्य को सत्य, विनम्रता, प्रेम और आत्मज्ञान का संदेश देते हैं।

कबीर जयंती के अवसर पर लोग उनके विचारों को याद करते हैं और अपने प्रियजनों को प्रेरणादायक संदेश भेजते हैं। आइए जानते हैं संत कबीर के कुछ प्रसिद्ध दोहे और उनका गहरा अर्थ।

  1. चलती चक्की देख के…

चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोए
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए।

इस दोहे में कबीरदास बताते हैं कि संसार की मोह-माया और संघर्षों के बीच कोई भी व्यक्ति पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह पाता।

  1. ज्यों तिल माहि तेल है…

ज्यों तिल माहि तेल है, ज्यों चकमक में आग
तेरा साईं तुझ ही में है, जाग सके तो जाग।

कबीरदास का संदेश है कि ईश्वर बाहर नहीं, बल्कि हर इंसान के भीतर मौजूद है। जरूरत केवल आत्मज्ञान की है।

  1. जग में बैरी कोई नहीं…

जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होए
यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोए।

यदि मन शांत और विनम्र हो, तो दुनिया में कोई शत्रु नहीं रहता। अहंकार छोड़ने से प्रेम और दया का भाव बढ़ता है।

  1. गुरु महिमा पर दोहा

सब धरती कागज करूं, लेखनी सब वनराज
सात समुद्र की मसि करूं, गुरु गुण लिखा न जाए।

इस दोहे में गुरु के महत्व को बताया गया है। कबीरदास के अनुसार गुरु की महिमा का वर्णन शब्दों में संभव नहीं है।

  1. मलिन आवत देख के…

मालन आवत देख के, कलियन करें पुकार
फूले-फूले चुन लिए, काल्हि हमारी बार।

यह दोहा जीवन की नश्वरता को दर्शाता है। कबीरदास बताते हैं कि जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए समय का सही उपयोग करना चाहिए।

  1. जाती न पूछो साधु की…

जाती न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान
मोल करो तलवार का, पड़ा रहने दो म्यान।

कबीरदास समाज को संदेश देते हैं कि व्यक्ति की पहचान उसके ज्ञान और गुणों से होनी चाहिए, न कि जाति से।

  1. तीरथ गए से एक फल…

तीरथ गए से एक फल, संत मिले फल चार
सतगुरु मिले अनेक फल, कहे कबीर विचार।

कबीरदास के अनुसार सच्चे गुरु और संत का साथ जीवन को नई दिशा देता है।

  1. नहाए धोए क्या हुआ…

नहाए धोए क्या हुआ, जो मन मैल न जाए
मीन सदा जल में रहे, धोए बास न जाए।

बाहरी स्वच्छता से ज्यादा जरूरी मन की पवित्रता है।

  1. कबीर सुता क्या करे…

कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी
एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पांव पसारी।

यह दोहा जीवन की सच्चाई को दर्शाता है और समय रहते अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है।

  1. दुःख में सुमिरन सब करे…

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय।

कबीरदास कहते हैं कि इंसान को केवल कठिन समय में ही नहीं, बल्कि सुख के समय भी ईश्वर को याद रखना चाहिए।

संत कबीरदास के ये दोहे आज भी जीवन को सरल, सकारात्मक और संतुलित बनाने की प्रेरणा देते हैं। उनकी वाणी समाज में प्रेम, समानता और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश फैलाती है।

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