REPORT : RAKHI VERMA
Middle East Crisis : लगातार बढ़ते पेट्रोल डीजल के दाम, जनता परेशान ,वैश्विक संकट पर मंथन, क्या निकलेगा सोल्यूशन ?
Middle East Crisis : नमस्कार स्वदेश agenda देख रहे है आप….मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से भारतीय अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है…दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यस्था अब छठे पायदान पर खिसक गई है..जबकि केंद्र सरकार भारत को तीसरी अर्थव्यव्यथा के रुप में स्थापित करने के लिए कई कदम उठाने का दावा कर रही है….हालांकि इस गिरावट के पीछे रुपये में कमजोरी, मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, अमेरिका के टैरिफ बम को बताया जा रहा है….देश में इसका असर धीरे धीरे दिख रहा है…खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक मंचों पर इस खतरे से आगाह भी कर रहे है…और लोगों से फिजूलखर्ची रोकने और पेट्रोल-डीजल जैसे संसाधनों का कम से कम इस्तेमाल की अपील कर रहे हैं….लेकिन देश में लगातार बढ़ रहे दामों ने पेट्रोल और डीजल में आग लगा दी है…जिससे महंगाई की मार से जनता त्रस्त है..और लोगों की क्रय शक्ति कम होती जा रही है…ऐसे में बाजार में पैसे का रोटेशन न होने से भारत की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी भी बज गई है…अब सवाल है कि इस संकट से बचने का क्या कोई उपाय है…और केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए कौन से कदम उठाती है….इसी पर करेंगे विस्तार से चर्चा उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट |
Middle East Crisis : देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या वाकई कोई संकट के बादल मंडरा रहे है ? पिछले कई समय से मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव से ना सिर्फ खाड़ी देश बल्कि भारत पर भी अब इसका असर दिखने लगा है, पीएम मोदी ने इस वैश्विक संकट पर खुद भी चिंता जताई है और लोगों से बचत करने की अपील की है | लेकिन इस अपील से इतर जो हालात बने है उनसे कैसे बाहर निकला जायेगा ये एक बड़ा सवाल है | आइये सबसे पहले नजर डालते है कि आखिर जीडीपी में गिरावट क्यों हुई | इधर आम नागरिको को फिर बड़ा झटका लगा, पेट्रोल-डीजल महंगे होने से महंगाई की चिंता बढ़ती जा रही है
Middle East Crisis : 5 दिन में दूसरी बार तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल का दाम बढ़ाया है, जिसके लिए पेट्रोल पंपों को आधी रात को ही ईमेल कर दिया गया। पेट्रोल का रेट 87 पैसे और डीजल का रेट 91 पैसे बढ़ाया गया है, जबकि 15 मई को 3 रुपये से ज्यादा रेट बढ़ाया गया था। अप्रैल 2022 के बाद पहली बार ईंधन महंगा हुआ है, क्योंकि एक तरफ होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक होने से कच्चा तेल नहीं आ रहा। दूसरी तरफ, रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट देने से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इनकार कर दिया है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल महंगा होने से खाने-पीने की वस्तुएं महंगी होंगी, क्योंकि ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी। वहीं लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिससे ऑफिस जाने वालों, नौकरी करने वालों, ट्रांसपोर्टरों और छोटे व्यवसायियों के जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा जो हर वर्ग के लिए वहन करना आसान नहीं है
Middle East Crisis : बहरहाल पक्ष और विपक्ष के आरोप प्रत्यारोप कुछ भी हो लेकिन वैश्विक संकटों (जैसे आर्थिक मंदी, महामारी, या ऊर्जा संकट) के लिए अकेले किसी एक सरकार की नीतियां जिम्मेदार नहीं होती हैं। यह एक बहुआयामी प्रक्रिया है। मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर आर्थिक ढांचे, भू-राजनीतिक तनाव, प्राकृतिक आपदाओं और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में असंतुलन का मिश्रण होते हैं ऐसे में भारत काफी हद तक वैश्विक संकटों के प्रभावों से बचा रहा है, जिसका मुख्य कारण भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की सतर्क मौद्रिक नीतियां और सरकार के मजबूत आर्थिक कदम हैं। इसके अलावा, भारत ‘वोकल फॉर लोकल’) और आत्मनिर्भर भारत जैसी रणनीतियों के जरिए अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। इन तमाम प्रयासों के बीच जो हालत बने है वो फिलहाल ठीक होते नजर नहीं आते ऐसे में आगेकी रणनीति और कूटनीति क्या होगी ये वाकई एक बड़ा सवाल है |
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