Bee Protection in Summer : लू और बढ़ते तापमान से मधुमक्खियों पर संकट
REPORT : CHIRAG

Bee Protection in Summer : देशभर में लगातार बढ़ रही गर्मी और लू का असर अब मधुमक्खी पालन पर भी दिखाई देने लगा है। हिसार के कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मई-जून में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से मधुमक्खियों की कॉलोनियां कमजोर हो सकती हैं और शहद उत्पादन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। एल-नीनो प्रभाव के चलते मानसून कमजोर रहने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे मौनचरों और नैक्टर की उपलब्धता कम हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के दौरान यदि मधुमक्खियों की उचित देखभाल नहीं की गई, तो उनका जीवन संकट में पड़ सकता है। ऐसे में छत्तों का तापमान नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है, ताकि मधुमक्खियां अपनी ऊर्जा ठंडक बनाए रखने की बजाय पराग और मधुरस संग्रह में लगा सकें।
Bee Protection in Summer : छाया और ठंडे वातावरण की करें व्यवस्था
कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष सुनीता यादव ने बताया कि गर्मियों की शुरुआत में ही मधुमक्खी कॉलोनियों को छायादार स्थानों पर स्थानांतरित कर देना चाहिए। पेड़ों के नीचे रखी गई कॉलोनियां अधिक सुरक्षित रहती हैं क्योंकि पेड़ों की पत्तियां सूर्य की गर्म किरणों को रोककर प्राकृतिक ठंडक देती हैं। यदि प्राकृतिक छाया उपलब्ध न हो, तो फूस, टाट या अस्थायी शेड बनाकर भी छाया की व्यवस्था की जा सकती है। मधुमक्खी पालकों को अपनी एपियरी में शहतूत जैसे पेड़ लगाने की सलाह भी दी गई है, जो छाया के साथ-साथ मकरंद भी उपलब्ध कराते हैं।
Bee Protection in Summer : स्वच्छ पानी और वायु संचार बेहद जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार मधुमक्खियां पानी का उपयोग शहद को पतला करने, बच्चों के पालन और छत्ते का तापमान नियंत्रित रखने के लिए करती हैं। ऐसे में मौनालय के पास स्वच्छ और ताजे पानी की व्यवस्था बेहद जरूरी है। मिट्टी के कटोरे, सीमेंटेड टैंक या टपकते पानी की व्यवस्था मधुमक्खियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। कुलपति कंबोज ने बताया कि छत्तों में भीड़भाड़ नहीं होनी चाहिए। पर्याप्त फ्रेम उपलब्ध कराने और भीगे बोरे की पल्लियां रखने से तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा मौनगृह के प्रवेश द्वार खुले रखना, लकड़ी के छोटे टुकड़ों से वायु संचार बढ़ाना और आसपास की घास-फूस साफ रखना भी जरूरी है।
Bee Protection in Summer : थोड़ी सावधानी से बढ़ सकता है शहद उत्पादन
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में थोड़ी अतिरिक्त सावधानी अपनाकर मधुमक्खियों को सुरक्षित रखा जा सकता है। पर्याप्त पानी, छाया, वायु संचार और सही देखभाल से कॉलोनियां स्वस्थ रहती हैं और शहद उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। मधुमक्खी पालकों को समय रहते जरूरी इंतजाम करने की सलाह दी गई है, ताकि भीषण गर्मी का असर कम किया जा सके।





