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Mumbai निर्यातकों को बड़ी राहत: US-ईरान युद्ध के चलते बंदरगाहों पर फंसे फल-सब्जियों के कंटेनर, JNPA ने माफ किया 100% स्टोरेज शुल्क

Mumbai

Mumbai पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भारतीय कृषि निर्यात की कमर तोड़ दी है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ मार्ग बाधित होने के कारण खाड़ी देशों को जाने वाले सैकड़ों कंटेनर बंदरगाहों पर अटक गए हैं। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) ने निर्यातकों और किसानों को वित्तीय बर्बादी से बचाने के लिए भारी राहत उपायों की घोषणा की है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री जयकुमार रावल ने स्पष्ट किया कि यह कदम नाशवान वस्तुओं (Perishable Goods) के सुरक्षित निर्यात और आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए उठाया गया है।

Mumbai प्रमुख राहत उपाय: क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ माफ?

निर्यातकों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम करने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित रियायतें दी हैं:

  • ग्राउंड रेंट/स्टोरेज शुल्क: बंदरगाह पर फंसे कंटेनरों के स्टोरेज और ड्वेल टाइम चार्जेस पर 100% की पूर्ण माफी दी गई है।
  • बिजली (Plug-in) चार्जेस: चूंकि फलों और सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए रीफर (Reefer) कंटेनरों को लगातार बिजली की जरूरत होती है, इसलिए इनके प्लग-इन चार्जेस में 80% की कटौती की गई है।
  • अतिरिक्त स्टैकिंग स्पेस: बंदरगाह परिसर में प्रभावित माल के लिए अलग से स्टोरेज और स्टैकिंग की सुविधा प्रदान की जाएगी।

Mumbai राहत की समय सीमा और पात्रता

यह विशेष छूट एक सीमित अवधि के लिए लागू की गई है ताकि वैकल्पिक मार्गों (जैसे केप ऑफ गुड होप) की तलाश की जा सके:

  • अवधि: यह छूट 28 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि से 14 मार्च 2026 की मध्यरात्रि तक (कुल 15 दिन) प्रभावी रहेगी।
  • पात्रता: वे सभी कंटेनर जो 28 फरवरी से टर्मिनल में मौजूद हैं या 8 मार्च 2026 की सुबह तक पोर्ट के भीतर आ चुके हैं, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा।

Mumbai संकट का पैमाना: 1000 से अधिक कंटेनर प्रभावित

युद्ध जैसी स्थिति के कारण Maersk और MSC जैसी प्रमुख शिपिंग लाइनों ने मिडिल ईस्ट के रूट्स को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है।

  • फंसा हुआ माल: लगभग 1000 कंटेनर (केला, अंगूर, प्याज और तरबूज) JNPA और गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर फंसे हुए हैं।
  • किसानों पर असर: माल के समय पर न पहुँचने और बंदरगाह पर सड़ने के डर से महाराष्ट्र और गुजरात के किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं।

Mumbai JNPA और महाराष्ट्र सरकार की यह पहल उन निर्यातकों के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित होगी जिनका माल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के बंद होने से अधर में लटका हुआ है। अधिकारियों ने टर्मिनल ऑपरेटर्स को इन छूटों को तत्काल लागू करने और कृषि कार्गो को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

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