India Vietnam Relation: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन के पड़ोसी देश वियतनाम के साथ भारत अपने रक्षा, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वियतनाम का चीन के साथ लंबे समय से सीमा और दक्षिण चीन सागर को लेकर विवाद रहा है। ऐसे में भारत और वियतनाम के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम है।
डोभाल की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने, रक्षा सहयोग बढ़ाने और समुद्री क्षेत्र में समन्वय मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी बातचीत हो सकती है।
India Vietnam Relation:चीन के साथ वियतनाम का पुराना विवाद, भारत के लिए क्यों अहम है यह यात्रा?
वियतनाम और चीन के रिश्तों में कई दशकों से तनाव के मुद्दे रहे हैं। वर्ष 1979 में दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर में समुद्री सीमाओं और द्वीपों पर दावों को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद बना हुआ है। इस क्षेत्र में समुद्री संसाधनों, व्यापारिक मार्गों और रणनीतिक प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा जारी है।
भारत के लिए वियतनाम केवल दक्षिण-पूर्व एशिया का एक महत्वपूर्ण देश नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक अहम रणनीतिक साझेदार भी है। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत वियतनाम की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में अजीत डोभाल की यात्रा को दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
India Vietnam Relation: राष्ट्रपति तो लाम से मुलाकात, व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर रहेगा जोर
अजीत डोभाल की यात्रा के दौरान वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के साथ मुलाकात और उच्चस्तरीय बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत अब तक हुई प्रगति की समीक्षा और भविष्य के सहयोग पर चर्चा होगी। दोनों देश पहले से ही रक्षा, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग कर रहे हैं।
पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क भी बढ़ा है। वियतनाम के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव तो लाम ने मई में भारत का दौरा किया था। वहीं, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग ने सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। इससे पहले भारत और वियतनाम के बीच सुरक्षा संवाद भी हुआ था। ऐसे में डोभाल की यात्रा को दोनों देशों के बीच बनी सहमति को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
India Vietnam Relation: रक्षा और समुद्री सुरक्षा में बढ़ेगा सहयोग, हिंद-प्रशांत पर खास फोकस
अजीत डोभाल की यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा प्रमुख एजेंडे में शामिल रहने की संभावना है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों और क्षेत्रीय समुद्री विवादों के बीच भारत और वियतनाम समुद्री क्षेत्र में आपसी समन्वय को मजबूत करना चाहते हैं। बातचीत में नौसेनाओं के बीच सहयोग, समुद्री निगरानी, रक्षा तकनीक और सैन्य क्षमता बढ़ाने जैसे विषयों पर जोर रह सकता है।
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए पहले भी कई पहल की गई हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए वर्ष 2030 तक का दृष्टिकोण तय किया गया है। इसके तहत सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उपकरणों, तकनीकी सहयोग और लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर काम हो रहा है।
लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़े समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाओं और नौसेनाओं को एक-दूसरे की सुविधाओं और बंदरगाहों का उपयोग करने में मदद मिल सकती है। इससे समुद्री अभियानों और सैन्य सहयोग को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। हालांकि, किसी भी नई व्यवस्था या समझौते के अंतिम विवरण की पुष्टि आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर ही होगी।
India Vietnam Relation: मेक इन इंडिया और 500 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन से मजबूत होंगे रक्षा संबंध
भारत वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भी सहयोग कर रहा है। इसी दिशा में भारत ने वियतनाम को 500 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराई है। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में खरीद और सहयोग से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाना है। भारत की मेक इन इंडिया पहल के तहत भारतीय रक्षा उपकरणों और तकनीक के निर्यात की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं।
दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भी चर्चा होती रही है। वियतनाम की सैन्य क्षमता और भारत के रक्षा निर्यात के लिहाज से यह मुद्दा अहम माना जाता है। हालांकि, किसी भी खरीद या आपूर्ति को अंतिम समझौता तभी माना जा सकता है, जब दोनों पक्ष इसकी आधिकारिक पुष्टि करें।
India Vietnam Relation: साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऊर्जा में भी साझेदारी की तैयारी
भारत और वियतनाम का सहयोग अब पारंपरिक रक्षा और सुरक्षा मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक, साइबर सुरक्षा और ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
डोभाल की यात्रा के दौरान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के बीच संस्थागत संवाद को मजबूत करने पर भी चर्चा हो सकती है। इसके तहत समुद्री सुरक्षा और अन्य साझा सुरक्षा चुनौतियों पर नियमित बातचीत की व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर खतरों से निपटने में सहयोग भी दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है।
India Vietnam Relation: व्यापार में भी बढ़ रही नजदीकी, 18 अरब डॉलर तक पहुंचा कारोबार
भारत और वियतनाम के बीच आर्थिक संबंधों में भी लगातार विस्तार देखने को मिल रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में द्विपक्षीय व्यापार करीब 18 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत का वियतनाम को निर्यात लगभग 6.66 अरब डॉलर और वियतनाम से आयात करीब 11.62 अरब डॉलर बताया गया है।
दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने से आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती मिल रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं। रणनीतिक साझेदारी के साथ आर्थिक संबंधों का विस्तार भी भारत और वियतनाम के साझा हितों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
India Vietnam Relation: दक्षिण चीन सागर में भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है वियतनाम?
दक्षिण चीन सागर वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां से दुनिया के बड़े व्यापारिक मार्ग गुजरते हैं। चीन, वियतनाम सहित कई देशों के बीच इस क्षेत्र के द्वीपों और समुद्री सीमाओं को लेकर विवाद है। भारत की भी इस क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक रुचि है। भारत की ऊर्जा कंपनियां वियतनाम के साथ दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस से जुड़ी परियोजनाओं में सहयोग करती रही हैं।
वियतनाम के साथ मजबूत संबंध भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और साझेदारी बढ़ाने का अवसर देते हैं। इसके अलावा, भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए भी वियतनाम एक अहम साझेदार है। भारत क्षेत्र में स्वतंत्र और खुले समुद्री मार्गों, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान और क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन करता रहा है।
कुल मिलाकर, अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा को केवल द्विपक्षीय मुलाकात तक सीमित नहीं देखा जा रहा है। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, तकनीक और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना चाहते हैं। इसका असर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और भारत की एक्ट ईस्ट नीति पर भी देखने को मिल सकता है।


