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Cyber Crime Punishment: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक फोटो-वीडियो वायरल करने वाले दो साइबर अपराधियों को कड़ी सजा

Cyber ​​Crime Punishment

Cyber Crime Punishment: आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं में सुनाया गया फैसला

Cyber Crime Punishment: छपरा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीकांत सिंह ने साइबर थाना कांड संख्या 62/25 एवं सत्र वाद संख्या 1067/25 में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल कर ब्लैकमेल करने के दो आरोपियों को कड़ी सजा सुनाई।

सोनपुर थाना क्षेत्र के दरियापुर निवासी कुणाल गौतम और अकिलपुर थाना क्षेत्र के अकिलपुर निवासी प्रकाश यादव को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66E के तहत 2 वर्ष कारावास एवं 1 लाख रुपये जुर्माना, धारा 67 के तहत 2 वर्ष कारावास एवं 1 लाख रुपये जुर्माना तथा धारा 67A के तहत 4 वर्ष कारावास एवं 2 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

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इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 77 के अंतर्गत 3 वर्ष कारावास एवं 10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 256(2) के तहत 1 वर्ष एवं 10 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 251(2) के तहत 1 वर्ष एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त छह माह की सजा का प्रावधान किया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा तथा सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

Cyber Crime Punishment: इंस्टाग्राम के जरिए किया गया ब्लैकमेल, पांच गवाहों की हुई गवाही

मामले की शुरुआत 9 मार्च 2025 को हुई, जब मढ़ौरा थाना क्षेत्र के अवारी गांव निवासी ऋषि प्रताप सिंह ने साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक इंस्टाग्राम आईडी के माध्यम से उनकी बहन की अश्लील एवं अभद्र फोटो-वीडियो अपलोड कर आरोपियों द्वारा वायरल करने की धमकी दी गई और रुपये की मांग कर ब्लैकमेल किया गया।

पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया। 23 जून 2025 को न्यायालय ने आईटी एक्ट और बीएनएस के अंतर्गत संज्ञान लेते हुए आरोप गठन किया। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा एवं सहायक अधिवक्ता सुभाष दास ने सरकार का पक्ष रखा। न्यायालय में कुल पांच गवाहों की गवाही कराई गई, जिसके आधार पर दोष सिद्ध हुआ।

लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा ने बताया कि साइबर अपराध के मामले में यह बिहार की पहली सजा है जो इस प्रकार सुनाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बीएनएस के तहत भी पहले सजा का निर्णय छपरा न्यायालय द्वारा ही दिया गया था।

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यह फैसला साइबर अपराध के विरुद्ध कड़ा संदेश माना जा रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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