चीन रोक सकता है ब्रह्मपुत्र का बहाव, भारत के लिए बढ़ा जल संकट का खतरा: विशेषज्ञों की चेतावनी

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चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से में एक विशाल जलविद्युत परियोजना का निर्माण भारत के लिए एक रणनीतिक चिंता का विषय बनता जा रहा है। जहां बीजिंग इसे अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी कदम बता रहा है, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कहीं अधिक गहरी और खतरनाक मंशा छिपी हो सकती है।

ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन का सुपर मेगा डैम: क्या है परियोजना?

चीन तिब्बत क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी (जिसे वहां यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है) के ‘ग्रेट बेंड कैनियन’ पर एक सुपर मेगा डैम बना रहा है।

  • इस परियोजना की अनुमानित लागत $137 अरब डॉलर है।
  • इससे करीब 60,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन की योजना है।
  • यह दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोपावर परियोजनाओं में से एक होगी।

बीजिंग का दावा है कि यह परियोजना ऊर्जा उत्पादन के लिए है, लेकिन विशेषज्ञ इससे इत्तेफाक नहीं रखते।


एक्सपर्ट्स की चेतावनी: क्या है असली खतरा?

जल विशेषज्ञ प्रो. नयन शर्मा के मुताबिक, इस डैम के बनने के बाद चीन के पास ब्रह्मपुत्र के जल प्रवाह को नियंत्रित करने की ताकत होगी।

उन्होंने असम ट्रिब्यून से बातचीत में बताया कि:

  • भारत ब्रह्मपुत्र के निचले हिस्से में स्थित है, जिससे वह इस नदी पर चीन के फैसलों का सीधे तौर पर प्रभावित पक्ष बनता है।
  • चीन भारत को बिना चेतावनी दिए जल प्रवाह को कम या मोड़ सकता है, जिससे पूर्वोत्तर भारत में पानी की भारी कमी हो सकती है, खासकर गर्मियों के दौरान।

भारत-चीन के बीच जल बंटवारे की कोई संधि नहीं

एक बड़ा खतरा यह है कि:

  • भारत और चीन के बीच कोई जल समझौता मौजूद नहीं है, unlike the Indus Water Treaty between India and Pakistan।
  • इसका मतलब है कि चीन एकतरफा निर्णय लेकर नदी के बहाव को मोड़ सकता है और भारत को इसके खिलाफ कोई कानूनी सहारा नहीं मिलेगा।

प्रो. शर्मा के अनुसार, चीन के साथ किसी भी जल संधि की संभावना बहुत ही कम है, क्योंकि बीजिंग इस दिशा में सहयोग करने को तैयार नहीं दिखता।

भारत को क्या कदम उठाने चाहिए?

भारत को इस रणनीतिक खतरे को देखते हुए सक्रियता दिखाने की जरूरत है। प्रो. शर्मा के सुझाव:

  • सभी प्रमुख सहायक नदियों पर जल भंडारण ढांचे (बांध) बनाए जाएं।
  • जल संसाधन प्रबंधन में दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाए।
  • राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चीन पर दबाव बनाया जाए ताकि वह पारदर्शिता बरते।

ब्रह्मपुत्र का भविष्य और भारत की जल सुरक्षा

ब्रह्मपुत्र भारत के लिए केवल एक नदी नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर के राज्यों की जीवनरेखा है।
अगर चीन जल प्रवाह को नियंत्रित करता है:

  • असम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय जैसे राज्यों में खेती, पेयजल और बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में गंभीर असर पड़ सकता है।
  • यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ा खतरा बन सकता है।

अब समय है जागने का

ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की यह सुपर मेगा डैम परियोजना भारत के लिए सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक खतरे की घंटी है। भारत को अब जल कूटनीति और रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करके इस चुनौती का सामना करना होगा।

खासकर जब कोई संधि नहीं है, तब सतर्कता ही सुरक्षा है।

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