Aaj ka Panchang: 11 अगस्त 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सावन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि और मंगलवार का संयोग भगवान शिव और हनुमान जी की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अभिजीत मुहूर्त को महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं राहुकाल के दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्यों से बचने की परंपरा है।
आज के पंचांग के अनुसार, दिनभर के अलग-अलग समय का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है। खासतौर पर सावन मास में भगवान शिव की पूजा, प्रदोष काल में आराधना और मंगलवार होने के कारण हनुमान जी की उपासना को विशेष फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं 11 अगस्त का पंचांग, अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल, ब्रह्म मुहूर्त और देश के प्रमुख शहरों में इनके समय की पूरी जानकारी।
11 अगस्त 2026 का पंचांग
11 अगस्त को मंगलवार है और यह दिन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। मंगलवार होने के कारण इस दिन हनुमान जी की पूजा भी विशेष मानी जाती है।
आज के पंचांग के प्रमुख विवरण इस प्रकार हैं:
- दिन: मंगलवार, 11 अगस्त 2026
- मास: श्रावण
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: त्रयोदशी
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक
- राहुकाल: दोपहर 3:45 बजे से शाम 5:25 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:27 बजे से 5:08 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में गिना जाता है। वहीं राहुकाल को अशुभ समय मानते हुए इस अवधि में नए कार्यों की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है।
अभिजीत मुहूर्त में कौन से काम कर सकते हैं
अभिजीत मुहूर्त को किसी नए और महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। इस अवधि में नए कारोबार की शुरुआत, महत्वपूर्ण समझौते, जरूरी निर्णय, खरीदारी या किसी शुभ कार्य का आरंभ किया जा सकता है।
हालांकि, किसी भी बड़े धार्मिक या व्यक्तिगत कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित शुभ योग को भी ध्यान में रखना बेहतर माना जाता है, क्योंकि अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण मुहूर्त में कुछ बदलाव हो सकता है।
राहुकाल में किन कामों से बचना चाहिए
11 अगस्त को मंगलवार होने के कारण राहुकाल दोपहर 3:45 बजे से शाम 5:25 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नए काम की शुरुआत, महत्वपूर्ण कारोबारी निर्णय, बड़े लेन-देन या किसी नए कार्य का शुभारंभ करने से बचना चाहिए।
यदि किसी कारण से राहुकाल के दौरान यात्रा या जरूरी काम करना ही पड़े तो भगवान हनुमान और भगवान विष्णु का स्मरण करने तथा पूजा-पाठ के बाद कार्य शुरू करने की धार्मिक परंपरा है।
देश के 50 प्रमुख शहरों में अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग-अलग होने के कारण भारत के विभिन्न शहरों में अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल के समय में अंतर देखा जा सकता है। नीचे प्रमुख शहरों के अनुसार समय दिया गया है।
| शहर | अभिजीत मुहूर्त | राहुकाल |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | दोपहर 12:00 से 12:53 तक | दोपहर 3:45 से शाम 5:25 तक |
| मुंबई | दोपहर 12:15 से 1:08 तक | दोपहर 3:51 से शाम 7:07 तक |
| बेंगलुरु | दोपहर 12:01 से 12:53 तक | दोपहर 3:38 से शाम 6:48 तक |
| कोलकाता | सुबह 11:15 से दोपहर 12:07 तक | दोपहर 3:05 से शाम 6:20 तक |
| चेन्नई | सुबह 11:51 से दोपहर 12:43 तक | दोपहर 3:33 से शाम 6:39 तक |
| हैदराबाद | सुबह 11:57 से दोपहर 12:49 तक | दोपहर 3:34 से शाम 6:48 तक |
| अहमदाबाद | दोपहर 12:18 से 1:10 तक | शाम 4:04 से 7:16 तक |
| पुणे | दोपहर 12:12 से 1:04 तक | दोपहर 3:51 से शाम 7:03 तक |
| जयपुर | दोपहर 12:05 से 12:59 तक | दोपहर 3:51 से शाम 7:11 तक |
| लखनऊ | सुबह 11:46 से दोपहर 12:39 तक | दोपहर 3:27 से शाम 6:51 तक |
| सूरत | दोपहर 12:16 से 1:08 तक | दोपहर 3:59 से शाम 7:13 तक |
| कानपुर | सुबह 11:48 से दोपहर 12:41 तक | दोपहर 3:30 से शाम 6:53 तक |
| नागपुर | सुबह 11:56 से दोपहर 12:48 तक | दोपहर 3:34 से शाम 6:53 तक |
| विशाखापत्तनम | सुबह 11:41 से दोपहर 12:33 तक | दोपहर 3:15 से शाम 6:34 तक |
| इंदौर | दोपहर 12:08 से 1:00 तक | दोपहर 3:48 से शाम 7:04 तक |
| ठाणे | दोपहर 12:15 से 1:08 तक | दोपहर 3:51 से शाम 7:07 तक |
| भोपाल | दोपहर 12:02 से 12:55 तक | दोपहर 3:43 से शाम 6:58 तक |
| पिंपरी-चिंचवड़ | दोपहर 12:12 से 1:04 तक | दोपहर 3:51 से शाम 7:03 तक |
| पटना | सुबह 11:30 से दोपहर 12:22 तक | दोपहर 3:11 से शाम 6:34 तक |
| वडोदरा | दोपहर 12:16 से 1:08 तक | शाम 4:01 से 7:13 तक |
| गाजियाबाद | दोपहर 11:59 से 12:53 तक | दोपहर 3:45 से शाम 7:04 तक |
| लुधियाना | दोपहर 12:06 से 1:00 तक | दोपहर 3:51 से शाम 7:13 तक |
| आगरा | सुबह 11:57 से दोपहर 12:50 तक | दोपहर 3:39 से शाम 7:02 तक |
| नासिक | दोपहर 12:13 से 1:06 तक | दोपहर 3:50 से शाम 7:04 तक |
| फरीदाबाद | दोपहर 12:00 से 12:53 तक | दोपहर 3:45 से शाम 7:05 तक |
| मेरठ | दोपहर 11:59 से 12:53 तक | दोपहर 3:44 से शाम 7:04 तक |
| राजकोट | दोपहर 12:25 से 1:17 तक | शाम 4:08 से 7:22 तक |
| वाराणसी | सुबह 11:40 से दोपहर 12:33 तक | दोपहर 3:19 से शाम 6:44 तक |
| श्रीनगर | दोपहर 12:10 से 1:05 तक | दोपहर 3:52 से शाम 7:19 तक |
| छत्रपति संभाजीनगर | दोपहर 12:09 से 1:01 तक | दोपहर 3:46 से शाम 7:00 तक |
| धनबाद | सुबह 11:23 से दोपहर 12:15 तक | दोपहर 3:06 से शाम 6:27 तक |
| अमृतसर | दोपहर 12:10 से 1:04 तक | दोपहर 3:52 से शाम 7:18 तक |
| नवी मुंबई | दोपहर 12:15 से 1:08 तक | दोपहर 3:51 से शाम 7:07 तक |
| प्रयागराज | सुबह 11:44 से दोपहर 12:37 तक | दोपहर 3:24 से शाम 6:48 तक |
| रांची | सुबह 11:27 से दोपहर 12:20 तक | दोपहर 3:09 से शाम 6:30 तक |
| हावड़ा | सुबह 11:15 से दोपहर 12:07 तक | दोपहर 3:05 से शाम 6:20 तक |
| कोयंबटूर | दोपहर 12:02 से 12:54 तक | दोपहर 3:41 से शाम 6:50 तक |
| जबलपुर | सुबह 11:55 से दोपहर 12:48 तक | दोपहर 3:36 से शाम 6:51 तक |
| ग्वालियर | सुबह 11:58 से दोपहर 12:51 तक | दोपहर 3:41 से शाम 7:02 तक |
| विजयवाड़ा | सुबह 11:48 से दोपहर 12:40 तक | दोपहर 3:27 से शाम 6:40 तक |
| जोधपुर | दोपहर 12:16 से 1:10 तक | शाम 4:00 से 7:23 तक |
| मदुरै | सुबह 11:57 से दोपहर 12:49 तक | दोपहर 3:37 से शाम 6:44 तक |
| रायपुर | सुबह 11:45 से दोपहर 12:37 तक | दोपहर 3:28 से शाम 6:42 तक |
| कोटा | दोपहर 12:08 से 1:01 तक | दोपहर 3:52 से शाम 7:11 तक |
| गुवाहाटी | सुबह 10:55 से 11:47 तक | दोपहर 2:34 से शाम 5:58 तक |
| चंडीगढ़ | दोपहर 12:02 से 12:56 तक | दोपहर 3:51 से शाम 7:09 तक |
| सोलापुर | दोपहर 12:06 से 12:58 तक | दोपहर 3:43 से शाम 6:56 तक |
| हुबली-धारवाड़ | दोपहर 12:08 से 1:00 तक | दोपहर 3:38 से शाम 6:57 तक |
| बरेली | सुबह 11:53 से दोपहर 12:47 तक | दोपहर 3:38 से शाम 6:58 तक |
| देहरादून | दोपहर 11:58 से 12:52 तक | दोपहर 3:44 से शाम 7:04 तक |
सावन में मंगलवार का धार्मिक महत्व
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। वहीं मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में सावन और मंगलवार का संयोग धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो जाता है।
11 अगस्त को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि होने के कारण प्रदोष पूजा का भी विशेष महत्व है। मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की परेशानियों से राहत और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
भौम प्रदोष पर भगवान शिव की पूजा का महत्व
प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन शिवलिंग पर जल और अपनी श्रद्धानुसार पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। सावन होने के कारण शिव आराधना का महत्व और बढ़ जाता है।
मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और उनका ध्यान करने की भी धार्मिक मान्यता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत और पूजा कर सकते हैं।
राहुकाल में जरूरी काम हो तो क्या करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए। लेकिन यदि कोई काम पहले से निर्धारित है और उसे टालना संभव नहीं है, तो अपने आराध्य देव का स्मरण करके कार्य शुरू करने की परंपरा है।
हनुमान जी की उपासना करने वाले श्रद्धालु हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। यात्रा से पहले भगवान का स्मरण करना और सकारात्मक मन से घर से निकलना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।
11 अगस्त को कौन सा समय पूजा के लिए बेहतर है
सुबह का ब्रह्म मुहूर्त ध्यान, पूजा और आध्यात्मिक साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है। वहीं अभिजीत मुहूर्त में महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने की परंपरा है। भगवान शिव की आराधना करने वाले श्रद्धालु प्रदोष काल में विशेष पूजा कर सकते हैं।
अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और शुभ कार्यों का समय देखना अधिक उचित रहेगा।
आज के दिन क्या करें और क्या न करें
11 अगस्त को शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त का उपयोग किया जा सकता है। पूजा-पाठ, ध्यान, धार्मिक अनुष्ठान और भगवान शिव तथा हनुमान जी की आराधना के लिए दिन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं राहुकाल के दौरान नए कारोबार की शुरुआत, बड़े वित्तीय निर्णय, महत्वपूर्ण समझौते या अन्य मांगलिक कार्यों को टालने की धार्मिक परंपरा है। किसी भी शुभ कार्य से पहले स्थानीय पंचांग और परिवार की धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखना उचित रहेगा।
निष्कर्ष
11 अगस्त 2026 का दिन सावन, मंगलवार और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के कारण धार्मिक दृष्टि से खास है। अभिजीत मुहूर्त में शुभ कार्यों की शुरुआत की जा सकती है, जबकि राहुकाल में नए कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। सावन के इस दिन भगवान शिव और हनुमान जी की आराधना कर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता की कामना कर सकते हैं।
नोट: पंचांग और मुहूर्त के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। ऊपर दिए गए समय उपलब्ध पंचांग विवरण के आधार पर हैं।



